11 जून 2026 से शुरू होगा दुर्लभ सिद्ध काल, जानिए इसका धार्मिक महत्व और करने योग्य 5 उपाय

Temple and zodiac in the picture

अधिकमास (पुरुषोत्तम मास) का अंतिम चरण चल रहा है, जो 15 जून तक समाप्त होगा, लेकिन ऐसे वर्षों के बाद संयोग बन रहा है कि अधिकमास में बहुत कम समय के अंतराल में एकादशी, प्रदोष व्रत, सोमवती अमावस्या और मिथुन संक्रांति का योग बन रहा है। 

 

1. परमा एकादशी:

11 जून 2026 को परमा एकादशी का व्रत रखा जाएगा जिसका खास महत्व है और यह विष्णु पूजा के लिए शुभ दिन है।  नि:स्वार्थ भावना से रखा गया यह परमा एकादशी का व्रत कल्पतरू वृक्ष के समान फलदायी है, जिससे हर मनोकामना पूरी होती है।

 

2. शुक्र प्रदोष व्रत:

12 जून को शुक्र प्रदोष का व्रत रखा जाएगा जो कि भगवान विष्णु, लक्ष्मी और शिव पूजा के लिए शुभ है। यह व्रत जीवन से दरिद्रता को मिटाकर सुख, समृद्धि और वैभव लाता है। यदि पति-पत्नी के बीच अनबन रहती है, तो यह व्रत रखने से आपसी प्रेम बढ़ता है और वैवाहिक जीवन सुखमय होता है। संतान प्राप्ति की कामना रखने वाले दंपत्तियों के लिए भी यह व्रत बेहद फलदायी माना गया है। इस व्रत से कुंडली में शुक्र ग्रह मजबूत होता है और मानसिक शांति मिलती है।

 

3. सोमवती अमावस्या:

15 जून को सोमवती अमावस्या रहेगी। इस दिन पितरों को पिंडदान और तर्पण किया जाएगा। अमावस्या तिथि को पितरों की तिथि माना जाता है। पवित्र नदी में स्नान करने के बाद तट पर ही पितरों के नाम का तर्पण किया जाता है। इस दिन को नदियों, तीर्थों में स्नान, गोदान, अन्न दान, ब्राह्मण भोजन, वस्त्र आदि दान के लिए विशेष माना जाता है। आप भी सोमवती अमावस्या के दिन यह खास उपाय आजमा कर आप अपनी दरिद्रता दूर कर स्थायी लक्ष्मी की प्राप्ति कर सकते हैं।  

 

4. मिथुन संक्रांति:

15 जून को ही मिथुन संक्रांति होगी। इस दिन सूर्य और पितृ पूजा का महत्व रहेगा। अन्य संक्रांतियों की तरह मिथुन संक्रांति पर भी पवित्र नदियों में स्नान और दान का विशेष महत्व है। इस दिन गरीब लोगों को अन्न, वस्त्र, पानी का घड़ा, छाता और पंखा दान करने से पुण्य मिलता है। साथ ही, इस दिन पूर्वजों (पितरों) के नाम तर्पण करने से घर में सुख-शांति आती है।



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