
शनि की साढ़ेसाती के दूसरे चरण का प्रभाव:
साढ़ेसाती का दूसरा चरण 'शिखर' माना जाता है, जो मानसिक और पारिवारिक तनाव दे सकता है। यह चरण सबसे कठिन माना जाता है। इसका प्रभाव पारिवारिक और सामाजिक जीवन पर होता है। रिश्तों में दरार और मानसिक अशांति संभव है।
कहते हैं कि इस चरण में जातक को अपने जीवन में आर्थिक और पारिवारिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। रिश्तेदार कष्ट देते हैं और जातक को परिवार से दूर लम्बी यात्राओं पर भी जाना पड़ सकता है। शारीरिक रोग के साथ ही मानसिक तनाव भी झेलना होता है। छोटे से कार्य को करने के लिए भी सामान्य से अधिक प्रयास करने होते हैं फिर भी सफलता की कोई गारंटी नहीं। परिवार, मित्र और रिश्तेदार सभी लोग उसका साथ छोड़ देते हैं।
साढ़ेसाती का अचूक उपाय
1. मुख्य उपाय:
बृहस्पतिवार का उपवास करें और प्रत्येक मंगलवार के दिन हनुमान जी के मंदिर में गुड़ एवं चने के प्रसाद का वितरण करें। मंगलवार और शनिवार को चमेली के तेल का दीपक जलाकर सिंदूर अर्पित करें।
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2. शनिवार को जलाएं तेल का दीपक:
शनिवार को शाम के समय पीपल के पेड़ के नीचे चौमुखा दीपक जलाने से धन, वैभव और यश में वृद्धि होती है। नौकरी पेशा व्यक्ति की ऑफिस में स्थिति अच्छी होती है। वहीं व्यापार वाले के बिजनेस में भी वृद्धि होती है।
3. काले कुत्ते को रोटी:
शनिवार के दिन काले कुत्तों को सरसों का तेल लगी हुई रोटी खिलाने से शनिदेव प्रसन्न होते हैं। शनिदेव के प्रसन्न होने से जीवन में खुशहाली बनी रहती है। शनिवार के दिन काले वस्त्र धारण करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और उस दिन होने वाले काम में सफलता मिलती है।
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4. काली चीजों का दान:
शनि देव कर्म और न्याय के देवता हैं, इसलिए सेवा से उन्हें प्रसन्न किया जा सकता है। शनिवार के दिन किसी भी चीज के बुरे फल को दूर करने के लिए काली चीजों यानी कि जैसे- काला कपड़ा, काले तिल, उड़द की दाल, काले चने, लोहे की चीजें, सरसों का तेल आदि को किसी गरीब या असहाय व्यक्ति को दान में देने से शनिदेव की कृपा बनी रहती है। या किसी गरीब, बूढ़े, या अपाहिज व्यक्ति को भोजन या सहायता दें।
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