Jyeshtha Month 2026: ज्येष्ठ माह में क्या करें और क्या नहीं?

तस्वीर में ज्येष्ठ मास में करने योग्य विशेष कार्यों जैसे प्याऊ लगाना, पशु-पक्षियों के लिए सकोरे रखना, पौधों को पानी देना आदि से संबंधित जानकारी देता चित्र

Jyeshtha Maah 2026: ज्येष्ठ मास हिंदू कैलेंडर का तीसरा महीना है, जिसमें सूर्य अपनी पूरी तपिश पर होता है। इस महीने में प्रकृति और स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर कुछ विशेष नियम बनाए गए हैं। ज्येष्ठ मास का महत्व धार्मिक, आध्यात्मिक और मौसमीय दृष्टि से बहुत अधिक है। ज्येष्ठ मास को भगवान विष्णु और विशेष रूप से पितृ देवताओं की पूजा का समय भी माना जाता है। 'ज्येष्ठ' का अर्थ बड़ा भी होता है, इसलिए यह महीना अनुशासन और संयम का संदेश देता है।ALSO READ: Jyeshtha month festivals 2026: ज्येष्ठ माह के व्रत एवं त्योहार की लिस्ट

 

यहां ज्येष्ठ माह के लिए महत्वपूर्ण 'क्या करें' और 'क्या नहीं' से संबंधित खास जानकारी प्रस्तुत की गई है:

 

क्या करें (Dos)

1. जल/पानी का दान: इस महीने में प्याऊ लगवाना, पशु-पक्षियों के लिए परिंडे या सकोरे रखना और प्यासे को पानी पिलाना सबसे बड़ा पुण्य माना जाता है।

 

2. पेड़-पौधों की सेवा: भीषण गर्मी के कारण पौधों को जल देना और नए पौधे लगाना, विशेषकर छायादार वृक्ष का रोपण करना बहुत शुभ होता है।

 

3. खाने-पीने ठंडी चीजों का दान: इस माह में सत्तू, तिल, चंदन, गुड़, तरबूज और खरबूजे आदि वस्तुओं का दान करना चाहिए। ज्येष्ठ पूर्णिमा और निर्जला एकादशी पर दान का विशेष महत्व है।

 

4. हनुमान जी की पूजा: ज्येष्ठ के मंगलवार को 'बड़ा मंगल' (बुढ़वा मंगल) कहा जाता है। इस दिन हनुमान जी की आराधना और भंडारा करना कष्टों से मुक्ति दिलाता है।

 

5. दोपहर में विश्राम: आयुर्वेद के अनुसार, इस महीने की गर्मी से बचने के लिए दोपहर में थोड़ा विश्राम करना स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है।ALSO READ: Bada Mangal 2026: ज्येष्ठ का पहला बड़ा मंगल 5 मई को: बजरंगबली ने क्यों लिया था वृद्ध वानर का रूप? पढ़ें रोंगटे खड़े कर देने वाली ये पौराणिक कथाएं

 

क्या नहीं (Don'ts)

1. दोपहर में यात्रा से बचें: बहुत जरूरी न हो तो दोपहर की चिलचिलाती धूप में बाहर निकलने या यात्रा करने से बचें, इससे Heatstroke/लू लगने का डर रहता है।

 

2. भारी और गरिष्ठ भोजन: ज्यादा तेल-मसाले, गर्म तासीर वाली चीजें और भारी भोजन न करें। यह पाचन तंत्र को खराब कर सकता है।

 

3. पानी की बर्बादी: इस महीने जल की कमी रहती है, इसलिए पानी को व्यर्थ बहाना दोषपूर्ण माना जाता है।

 

4. दिन में सोना (अपवाद): शास्त्रों के अनुसार ज्येष्ठ में केवल अल्प विश्राम की अनुमति है, इस माह बहुत अधिक देर तक दिन में नहीं सोना चाहिए, इससे आलस्य बढ़ता है।

 

5. बड़े भाई से विवाद: 'ज्येष्ठ' का अर्थ ज्येष्ठ पुत्र या बड़ा भाई भी होता है। इस माह में अपने बड़े भाई या पिता तुल्य व्यक्तियों का अपमान नहीं करना चाहिए।


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