देशभर में नवरात्रि की धूम नज़र आ रही है। आज से नवरात्रि प्रारंभ हो चुके है और इसी के साथ भक्त मां की आराधना में व उनको प्रसन्न करने में जुट गए हैं। इन नौ दिनों मां की पूजा-अर्चना के साथ-साथ लोग उपवास भी रखते हैं, और इसका काफी महत्व भी माना जाता है। इस दिनों व्रत करने को लेकर लोगों की आस्था के साथ-साथ सेहत मंत्र भी जुड़े हुए हैं। नवरात्र में व्रत करना स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभदायक होता है। नौ दिन आप शरीर के लिए उपवास कर बहुत सी बीमारियों को छूमंतर कर सकते हैं। आइए जानते हैं किन कारणों से रखा जाता है नवरात्रि व्रत...
नवरात्रि का धार्मिक महत्व
महिषासुर नाम का एक बड़ा ही शक्तिशाली राक्षस था। वो अमर होना चाहता था और उसी इच्छा के चलते उसने ब्रह्मा की कठोर तपस्या की। ब्रह्माजी उसकी तपस्या से खुश हुए और उसे दर्शन देकर कहा कि उसे जो भी वर चाहिए वो मांग सकता है। महिषासुर ने अपने लिए अमर होने का वरदान मांगा। महिषासुर की ऐसी बात सुनकर ब्रह्मा जी बोले, 'जो इस संसार में पैदा हुआ है उसकी मौत निश्चित है। इसलिए जीवन और मृत्यु को छोड़कर जो चाहो मांग लोग। ऐसा सुनकर महिषासुर ने कहा,' ठीक है प्रभु, फिर मुझे ऐसा वरदान दीजिए कि मेरी मृत्यु ना तो किसी देवता या असुर के हाथों हो और ना ही किसी मानव के हाथों। अगर हो तो किसी स्त्री के हाथों हो। महिषासुर की ऐसी बात सुनकर ब्रह्माजी ने तथास्तु कहा और चले गए।
इसके बाद तो महिषासुर राक्षसों का राजा बन गया उसने देवताओं पर आक्रमण कर दिया। उन्होंने एकजुट होकर महिषासुर का सामना किया जिसमें भगवान शिव और विष्णु ने भी उनका साथ दिया, लेकिन महिषासुर के हाथों सभी को पराजय का सामना करना पड़ा और देवलोक पर महिषासुर का राज हो गया। महिषासुर से रक्षा करने के लिए सभी देवताओं ने भगवान विष्णु के साथ आदि शक्ति की आराधना की। उन सभी के शरीर से एक दिव्य रोशनी निकली जिसने एक बेहद खूबसूरत अप्सरा के रूप में देवी दुर्गा का रूप धारण कर लिया। देवी दुर्गा को देख महिषासुर उन पर मोहित हो गया और उनसे शादी करने का प्रस्ताव सामने रखा। बार बार वो यही कोशिश करता। देवी दुर्गा मान गईं लेकिन एक शर्त पर..उन्होंने कहा कि महिषासुर को उनसे लड़ाई में जीतना होगा। महिषासुर मान गया और फिर लड़ाई शुरू हो गई जो 9 दिनों तक चली। दसवें दिन देवी दुर्गा ने महिषासुर का अंत कर दिया...और तभी से ये नवरात्रि का पर्व मनाया जाता है।
नवरात्रि का वैज्ञानिक कारण
नवरात्रि में व्रत करने को लेकर वैज्ञानिक महत्व भी माना जाता है। वहीं वैज्ञानिक महत्वों के अनुसार प्रमुख नवरात्रि साल में दो बार आती है और दोनों ही नवरात्रि प्रायः ऋतु संधिकाल में या दो ऋतुओं के सम्मिलिन में मनाए जाते हैं। तो जब भी दो ऋतुओं का मिलन होता है तो उस समय शरीर में वात, पित्त, कफ का बढ़ जाता है। जिसके कारण मानव शरीर में रोग प्रतिरोध क्षमता कम होने लगती है। जिसके कारण इस समय बहुत सी बीमारियां व्यक्ति को घेर लेती हैं। डॉक्टर मानते हैं कि व्रत के दौरान श्रद्धालु जो चीजें खाते हैं, वह स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होता है। साथ ही मौसमी बीमारियों से बचाव भी होता है। उपवास रखने वाले लोग उबले हुए आलू, फल आदि खाते हैं, जिसमें कार्बोहाइड्रेट अधिक और प्रोटीन कम होता है। व्रत के दौरान इस्तेमाल किए जाने वाले भोजन आसानी से पच जाते हैं, इसलिए सेहत के लिए फायदेमंद रहता है।
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