उत्पन्ना एकादशी पर जरूर करें यह काम, पूरी होगी मनोकामना

22 नवंबर 2019 दिन शुक्रवार को उत्पन्ना एकादशी तिथि है इस दिन व्रत रखकर उपवास व्रत रखकर लक्ष्मीपति भगवान श्री विष्णु जी का विशेष पूजन अर्चन करने का विधान है। मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि जिसे उत्पन्ना एकादशी कहा जाता है, शास्त्रोंक्त मान्यता है कि इस व्रत रखकर भगवान विष्णु जी के इन मंत्रों का जप करने से व्रती की सभी मनोकामना पूरी हो जाती है। जानें उत्पन्ना एकदशी पर कैसे करें पूजा एवं कौन से मंत्रों का जप करें।

 

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मनोकामना पूर्ति के उत्पन्ना एकादशी पर इन श्री विष्णु मंत्रों का जप सुबह एवं शाम को तुलसी की माला से 108 बार करें-

- ॐ ह्रीं कार्तविर्यार्जुनो नाम राजा बाहु सहस्त्रवान, यस्य स्मरेण मात्रेण ह्रतं नष्टं च लभ्यते।।

- ॐ ह्रीं ह्रीं श्री लक्ष्मी वासुदेवाय नम:।।

- ॐ श्रीं, ऊं ह्रीं श्रीं, ऊं ह्रीं श्रीं क्लीं वित्तेश्वराय: नमः।।

जीवन में तरक्की, उन्नति एवं घर परिवार में सुख-शांति के लिए जपे यह मंत्र

- ॐ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो विष्णु प्रचोदयात्।।
- ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।।

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समस्त समस्याओं से मुक्ति के लिए

1- ॐ आं संकर्षणाय नम:।।

2- ॐ अं प्रद्युम्नाय नम:।।

3- ॐ अ: अनिरुद्धाय नम:।।

4- ॐ नारायणाय नम:।।

 

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उपरोक्त मंत्रों का जप करने के बाद भगवान विष्णु की आरती का श्रद्धापूर्वक पाठ करें।

1- ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट, दास जनों के संकट, क्षण में दूर करें।
ॐ जय जगदीश हरे।।

2- जो ध्यावे फल पावे, दुःखबिन से मन का, स्वामी दुःखबिन से मन का।
सुख सम्पति घर आवे, सुख सम्पति घर आवे, कष्ट मिटे तन का।।
ॐ जय जगदीश हरे।।

3- मात पिता तुम मेरे, शरण गहूं किसकी, स्वामी शरण गहूं मैं किसकी।
तुम बिन और न दूजा, तुम बिन और न दूजा, आस करूं मैं जिसकी।।
ॐ जय जगदीश हरे।।

4- तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी, स्वामी तुम अन्तर्यामी।
पारब्रह्म परमेश्वर, पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सब के स्वामी।।
ॐ जय जगदीश हरे।।

5- तुम करुणा के सागर, तुम पालनकर्ता, स्वामी तुम पालनकर्ता।
मैं मूरख फलकामी मैं सेवक तुम स्वामी, कृपा करो भर्ता।।
ॐ जय जगदीश हरे।।

6- तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति, स्वामी सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूं दयामय, किस विधि मिलूं दयामय, तुमको मैं कुमति।।
ॐ जय जगदीश हरे।।

7- दीन–बन्धु दुःख–हर्ता, ठाकुर तुम मेरे, स्वामी रक्षक तुम मेरे।।
अपने हाथ उठाओ, अपने शरण लगाओं द्वार पड़ा तेरे।।
ॐ जय जगदीश हरे।।

8- विषय–विकार मिटाओ, पाप हरो देवा, स्वमी पाप हरो देवा।
श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ, श्रद्धा भक्ति बढ़ाओं, सन्तन की सेवा।।
ॐ जय जगदीश हरे।।

9- यह आरती, जो कोई नर गावे। स्वामी जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी, सुख संपत्ति पावे॥
ॐ जय जगदीश हरे।।

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