यूं तो भगवान शिव के भी मंदिर पूरे देश के कोने-कोने में स्थित है। हिंदू धर्म के त्रिदवों व आदि पंच देवों में से एक भगवान भोलेनाथ भी है। ऐसे में भगवान शंकर के केदारनाथ, सोमनाथ, काशी विश्वनाथ, अमरनाथ आदि शिव मंदिरों पर वैसे तो रोजाना ही भींड़ होती है,लेकिन इनके अलावा भी भगवान शिव के कई प्रसिद्ध मंदिर हैं। जिनके दर्शन हर शिवभक्त अवश्य करना चाहता है।
ऐसे में कश्मीर की उत्तरी घाटियों से लेकर तमिलनाडु के दक्षिणी तटों तक, आपको पूरे कस्बों और शहरों में कई मंदिर मिलेंगे। यदि हम यह कहें कि यहां हर मोड़ पर एक मंदिर है, तो गलत नहीं होगा। भारत की आस्था व यहां के मंदिर दूर−दूर से श्रद्धालुओं को अपनी ओर खींच लाते हैं। वैसे तो हर मंदिर की अपनी एक अलग खासियत है, लेकिन भारत में ऐसे कई मंदिर हैं, जो पूरी तरह से भगवान शिव को समर्पित हैं। ऐसे में आज हम आपको भारत में मौजूद कुछ शिव मंदिरों के बारे में बता रहे हैं...
: दक्षेश्वर महादेव मंदिर
दक्षेस्वर महादेव मंदिर कनखल हरिद्वार उत्तराखण्ड में है। दक्षेश्वर महादेव मंदिर वर्ष 1810 में दनकौर की रानी द्वारा स्थापित किया गया था। यह बालद्वार से लगभग 4 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस मंदिर का नाम देवी सती के पिता के नाम पर रखा गया है। वर्ष 1962 में इसका जीर्णोद्धार भी किया गया है। महाशिवरात्रि के अवसर पर इस आकर्षक मंदिर में एक महान उत्सव मनाया जाता है।
: भवनाथ महादेव मंदिर
गुजरात के जूनागढ़ जिले में स्थित, यह मंदिर हिंदू धर्म के साथ−साथ जैन धर्म के लोगों के लिए मुख्य स्थानों में से एक है। इस मंदिर का एक मुख्य आकर्षण भवनाथ मेला है। यहां पर नागा साधुओं की उपस्थिति और उनके आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए आपको इस मेले के समय यहां रहना चाहिए।
: लिंगराज मंदिर
लिंगराज मंदिर ओडिशा में भुवनेश्वर के सबसे पुराने मंदिरों में से एक है। कलिंग शैली की वास्तुकला का एक अद्भुत चमत्कार, लिंगराज का शानदार मंदिर भगवान हरिहर के समर्पण में बनाया गया है, जो भगवान शिव के एक अवतार के रूप में जाने जाते हैं। भले ही यह मंदिर शुरू में सोमवंशी वंश के शासकों द्वारा स्थापित किया गया था, लेकिन बाद में इसे पुनर्निर्मित किया गया और गंगा वंश के शासकों द्वारा थोड़ा संशोधित किया गया।
: अन्नामलाईयार मंदिर
अन्नामलाईयार मंदिर तिरुवनमलाई में स्थित है और तमिलनाडु में प्रसिद्ध शिव मंदिरों की सूची में सबसे ऊपर आता है। इस मंदिर की वास्तुकला हर किसी को बेहद आकर्षित करती है। यह तमिल क्षेत्र के कई शास्त्रों के लिए भी एक प्रेरणा है और अधिक महत्वपूर्ण बात यह है कि एक ही दिन में पांच अनुष्ठान होते हैं। इस मंदिर में जाने का सबसे अच्छा समय कार्तिगई दीपम त्योहार के समय का है।
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