जो ब्राह्मण काम, क्रोध, पाखंड से निर्लिप्त हो, जो सदैव सत्य संभाषण करता हो, जो जितेन्द्रिय हो, जो पूर्णत: शुद्ध मंत्रोच्चार करता हो, जिसे अनुष्ठान व ग्रह शांति विधान का पूर्ण ज्ञान हो, जो नित्य संध्या व अग्निहोत्र करता हो, ऐसे ब्राह्मण को ही आचार्य ...
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