
बृहस्पति की 'अतिचारी' चाल का रहस्य
सामान्यतः गुरु एक राशि में लगभग एक वर्ष का समय बिताते हैं, लेकिन 14 मई 2025 से कहानी बदलने वाली है। गुरु अपनी सामान्य गति को छोड़कर 'अतिचारी' (अत्यंत तीव्र गति) हो जाएंगे।
उथल-पुथल की शुरुआत: 14 मई 2025 को गुरु वृषभ से निकलकर मिथुन में जब से गए हैं जलवायु परिवर्तन के साथ ही राजनीतिक उथल पुथल प्रारंभ हो गए है। इसी राशि से उन्होंने अतिचारी चाल प्रारंभ की है।
तेज रफ्तार का खेल: अक्टूबर 2025 में वे तेजी से कर्क राशि में प्रवेश करेंगे, फिर वक्री होकर वापस मिथुन में लौटेंगे और जून 2026 में पुनः कर्क में जाएंगे।
8 वर्षों का चक्र: गुरु की यह असामान्य गति अगले 8 वर्षों तक जारी रहने वाली है। ज्योतिषीय इतिहास गवाह है कि जब-जब गुरु अतिचारी हुए हैं, पृथ्वी पर बड़े सत्ता परिवर्तन और युद्ध हुए हैं।
महाभारत काल की पुनरावृत्ति?
इतिहास के पन्ने पलटें तो पता चलता है कि लगभग 5000 साल पहले महाभारत युद्ध के समय भी गुरु 7 वर्षों तक अतिचारी रहे थे। यही स्थिति प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान भी देखी गई थी। हाल ही में 2018 से 2022 के बीच जब गुरु अतिचारी हुए, तो पूरी दुनिया ने 'कोरोना' जैसी वैश्विक विभीषिका और आर्थिक मंदी का सामना किया। अब वैसी ही स्थिति फिर से दस्तक दे रही है।
भारत का भविष्य: शक्ति, संघर्ष और विजय
भारत की कुंडली के लिहाज से यह समय 'अग्निपरीक्षा' और 'अमृत काल' दोनों का मिश्रण है:
रणक्षेत्र और पराक्रम: 2 जून 2026 के आसपास जब गुरु कर्क राशि में होंगे, तब भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा पर तनाव अपने चरम पर पहुँच सकता है। भविष्यवाणी के संकेत बताते हैं कि 2027 के अंत तक पाकिस्तान के भौगोलिक अस्तित्व में बड़े बदलाव (टुकड़े) संभव हैं।
विश्व पटल पर भारत का उदय: 31 मार्च 2025 से भारत मंगल की महादशा में प्रवेश कर चुका है। 2032 तक चलने वाली यह दशा भारत को एक ऐसी सैन्य और कूटनीतिक शक्ति के रूप में स्थापित करेगी, जिसके आगे दुनिया की कोई भी ताकत टिक नहीं पाएगी।
नेतृत्व का उदय: अक्टूबर 2026 में गुरु का सिंह राशि में प्रवेश भारत में अत्यंत प्रभावशाली और दूरदर्शी नेतृत्व को और मजबूती प्रदान करेगा।
वैश्विक प्रभाव: भ्रम का जाल और प्राकृतिक आपदाएं
सूचना युद्ध: मिथुन राशि में गुरु के रहने से मीडिया और इंटरनेट पर फेक न्यूज़ और कूटनीतिक भ्रम का बोलबाला रहेगा।
प्रलयंकारी जलवायु: गुरु चूंकि जीवन और शीतलता के कारक हैं, उनकी बिगड़ी चाल बड़े पैमाने पर जलवायु परिवर्तन लाएगी। कर्क राशि (जल तत्व) में उनकी स्थिति विनाशकारी बाढ़, समुद्री तूफान और जल संकट का कारण बन सकती है।
ज्ञान के नए द्वार: हर विनाश अपने साथ सृजन भी लाता है। जैसे महाभारत के बीच 'गीता' का जन्म हुआ, वैसे ही इस कठिन समय में आध्यात्मिक जागृति और विज्ञान के क्षेत्र में क्रांतिकारी खोजें भी होंगी।
बृहस्पति की यह असामान्य गति संकेत दे रही है कि पुराना विश्व ढांचा ढहने की कगार पर है। जहाँ एक ओर युद्ध और आपदाओं की परछाई है, वहीं दूसरी ओर भारत के लिए यह काल अपनी खोई हुई प्रतिष्ठा को प्राप्त कर 'विश्व गुरु' बनने की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित होगा।
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