
बसंत पंचमी तिथि प्रारंभ: 23 जनवरी 2026 को 02:28 एएम बजे से।
बसंत पंचमी तिथि समाप्त: 24 जनवरी 2026 को 01:46 एएम बजे।
बसंत पंचमी 2026 अमूझ मुहूर्त काल:
वर्ष में साढ़े तीन अबूझ मुहूर्त होते हैं। जैसे चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, अक्षय तृतीया (वैशाख शुक्ल तृतीया), विजयादशमी (आश्विन शुक्ल दशमी) और कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा का आधा भाग। इस बार बसंत पंचमी के समय को भी अबूझ मुहूर्त जैसा काल कहा जा रहा है। ज्योतिष के अनुसार हिंदू पंचांग वर्ष में साढ़े तीन ऐसे अबूझ मुहूर्त है जिसमें मुहूर्त देखने की जरूरत नहीं है क्योंकि संपूर्ण दिन और रात ही इस दिन शुभ मानी गई।
बसंत पंचमी 2026 शुभ योग:
परीधी योग: इस दिन परीधी योग के बाद शिव योग रहेगा।
रवि योग: यह योग सभी दोषों को नष्ट करने वाला माना जाता है। इस योग में पूजा करने से मान-सम्मान और आरोग्य की प्राप्ति होती है।
सर्वार्थ सिद्धि योग: जैसा कि नाम से स्पष्ट है, इस योग में किया गया कोई भी कार्य "सिद्ध" होता है। यदि आप नया व्यापार, गृह प्रवेश या वाहन खरीदने की सोच रहे हैं, तो यह योग सर्वश्रेष्ठ है।
अमृत सिद्धि योग: इस योग का संयोग कार्यों में स्थायित्व और सफलता सुनिश्चित करता है।
बसंत पंचमी 2026 पर ग्रहों की विशेष स्थिति
मालव्य और शश राजयोग: कई वर्षों बाद ऐसा संयोग बन रहा है जब शुक्र और शनि अपनी उच्च या स्वराशि में होकर राजयोग बना रहे हैं। यह सुख-सुविधाओं और करियर में तरक्की के लिए बहुत शुभ है।
बुधादित्य योग: बुद्धि के देवता बुध और तेज के प्रतीक सूर्य की युति से बुधादित्य योग बन रहा है, जो विद्यार्थियों और बौद्धिक कार्यों से जुड़े लोगों के लिए वरदान समान है।
बसंत पंचमी पर इस संयोग में क्या करना विशेष फलदायी होगा?
अक्षर अभ्यासम: छोटे बच्चों की शिक्षा की शुरुआत (पेंसिल पकड़ाना) करने के लिए यह दिन सर्वोत्तम है।
विद्या दान: इस दिन गरीब बच्चों को पेन, किताब या शिक्षा से जुड़ी सामग्री दान करने से मां सरस्वती की विशेष कृपा मिलती है।
पीले रंग का प्रयोग: चूंकि इस दिन गुरु (बृहस्पति) और सरस्वती दोनों का प्रभाव रहता है, इसलिए पीले वस्त्र पहनना और पीले पकवानों का भोग लगाना भाग्य बढ़ाता है।
एक सुझाव: इस बार बसंत पंचमी पर पूजा का सबसे श्रेष्ठ समय सुबह 07:00 बजे से दोपहर 12:35 बजे के बीच रहेगा।
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