
Gupt Navratri 2026 dates: हिंदू धर्म में चैत्र और शारदीय नवरात्रि के अलावा दो 'गुप्त नवरात्रि' का भी विधान है। गुप्त नवरात्रि शक्ति साधना का अत्यंत रहस्यमय और प्रभावशाली पर्व माना जाता है। माघ और आषाढ़ मास में आने वाली इन नवरात्रियों में सामान्य जनमानस के बजाय साधक, तांत्रिक और अघोरी अपनी साधना को सिद्ध करने के लिए 'दस महाविद्याओं' की उपासना करते हैं। गुप्त नवरात्रि में की जाने वाली यह साधना अत्यंत प्रभावशाली मानी जाती है। मान्यता है कि गुप्त नवरात्रि में दस महाविद्याओं या विशेष देवियों की आराधना करने से साधक को शीघ्र और मनचाहा फल प्राप्त होता है।ALSO READ: Gupt Navratri 2026: माघ गुप्त नवरात्रि साधना के 8 वो गुप्त रहस्य, जिन्हें आज भी छिपाकर रखते हैं साधक
गुप्त नवरात्रि कब है 2026
दस महाविद्याएं
गुप्त नवरात्रि पूजन विधि
गुप्त नवरात्रि-FAQs
आइए जानते हैं किन देवियों की आराधना से क्या फल प्राप्त होता है।
गुप्त नवरात्रि कब है 2026:
वर्ष 2026 में माघ गुप्त नवरात्रि 19 जनवरी, सोमवार से शुरू होगी और 27 जनवरी को समाप्त होगी।
दस महाविद्याएं.
गुप्त नवरात्रि में नौ दुर्गा के बजाय इन दस देवियों की विशेष पूजा होती है:
1. मां काली: शत्रुओं पर विजय और भय से मुक्ति के लिए मां काली की आराधना की जाती है।
2. मां तारा: आर्थिक उन्नति, मोक्ष और ज्ञान की प्राप्ति के लिए तारा देवी की पूजा फलदायी है।
3. मां त्रिपुर सुंदरी (ललिता): सुख-समृद्धि, सुंदरता और ऐश्वर्यपूर्ण जीवन के लिए इनकी साधना की जाती है।
4. मां भुवनेश्वरी: संतान सुख और पारिवारिक सुख-शांति के लिए भुवनेश्वरी देवी की कृपा अनिवार्य है।
5. मां छिन्नमस्ता: मानसिक शक्ति और सोची हुई कामनाओं की तत्काल पूर्ति के लिए इनकी पूजा की जाती है।
6. मां त्रिपुर भैरवी: आत्मविश्वास में वृद्धि और जीवन की बड़ी बाधाओं को दूर करने के लिए भैरवी माता का पूजन करें।
7. मां धूमावती: संकटों के नाश और दुर्भाग्य को दूर करने के लिए धूमावती देवी की आराधना की जाती है।
8. मां बगलामुखी: अदालती मामलों, वाद-विवाद और विरोधियों को शांत करने के लिए इनकी पूजा अचूक मानी जाती है।
9. मां मातंगी: वैवाहिक जीवन की समस्याओं को सुलझाने और कला के क्षेत्र में सफलता के लिए इनकी साधना करें।
10. मां कमला: धन की देवी मां लक्ष्मी का ही रूप हैं। पूर्ण ऐश्वर्य और धन प्राप्ति के लिए इनकी पूजा की जाती है।
गुप्त नवरात्रि पूजन विधि और विशेष सावधानियां:
गुप्त नवरात्रि की पूजा को 'गुप्त' रखने का विधान है। जितना अधिक इसे गुप्त रखा जाता है, फल उतना ही अधिक मिलता है।
समय: इसकी साधना विशेष रूप से मध्यरात्रि, निशिथ काल में करना श्रेष्ठ माना जाता है।
अखंड ज्योति: यदि संभव हो, तो नौ दिनों तक अखंड ज्योति प्रज्वलित करें।
मंत्र जाप: अपनी मनोकामना के अनुसार संबंधित देवी के मंत्रों का जाप करें।
सात्विकता: इन नौ दिनों में सात्विक आहार लें और ब्रह्मचर्य का पालन करें।
गुप्त नवरात्रि-FAQs
प्रश्न 1. गुप्त नवरात्रि क्या है और यह कब आती है?
उत्तर: वर्ष में चार नवरात्रि होती हैं। दो प्रकट (चैत्र और शारदीय) और दो गुप्त।
माघ गुप्त नवरात्रि: माघ मास के शुक्ल पक्ष में जनवरी या फरवरी में। माघ और आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष में गुप्त नवरात्रि)। इन्हें 'गुप्त' इसलिए कहा जाता है क्योंकि इनमें सार्वजनिक उत्सव के बजाय व्यक्तिगत साधना और तंत्रोक्त अनुष्ठानों पर बल दिया जाता है।ALSO READ: Gupt Navratri: गुप्त नवरात्रि में मां कालिका की यह साधना क्यों मानी जाती है खास? जानिए रहस्य
प्रश्न 2. दस महाविद्याएं कौन हैं?
उत्तर: दस महाविद्याएं शक्ति के दस विशेष रूप हैं, जो ज्ञान, शक्ति और मोक्ष की अधिष्ठात्री हैं। उनके नाम इस प्रकार हैं: मां काली, मां तारा, मां षोडशी (त्रिपुर सुंदरी), मां भुवनेश्वरी, मां छिन्नमस्ता, मां भैरवी, मां धूमावती, मां बगलामुखी, मां मातंगी, मां कमला
प्रश्न 3. गुप्त नवरात्रि की पूजा सामान्य नवरात्रि से कैसे अलग है?
उत्तर: गुप्त नवरात्रि में पूजा जितनी गुप्त रखी जाती है, फल उतना ही अधिक मिलता है। सामान्य नवरात्रि में सात्विक पूजा और व्रत होते हैं, जबकि गुप्त नवरात्रि में तामसिक और राजसिक साधनाएं- मंत्र जाप, हवन, तंत्र साधना अधिक होती हैं। प्रकट नवरात्रि सुख-शांति के लिए होती है, जबकि गुप्त नवरात्रि विशेष सिद्धियों और कठिन बाधाओं के निवारण के लिए होती है।
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