
यहां सभी 12 राशियों पर इसके प्रभाव का संक्षिप्त विवरण जानिए।
1. मेष: एकादश भाव (लाभ) में यह योग आय के नए स्रोत खोलेगा। बड़े भाई-बहनों से अनबन हो सकती है, लेकिन आर्थिक पक्ष बहुत मजबूत रहेगा।
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2. वृषभ: दशम भाव (कर्म) में यह योग करियर में बड़े बदलाव या पदोन्नति के संकेत दे रहा है। काम का बोझ बढ़ेगा, पर मान-सम्मान में वृद्धि होगी।
3. मिथुन: भाग्य स्थान (नवम) में यह योग धार्मिक यात्राओं और उच्च शिक्षा के योग बनाएगा। पिता के स्वास्थ्य का ध्यान रखें, भाग्य का साथ भरपूर मिलेगा।
4. कर्क: अष्टम भाव में यह योग अचानक दुर्घटना या स्वास्थ्य संबंधी परेशानी दे सकता है। गुप्त धन मिलने की संभावना है, लेकिन मानसिक तनाव बना रहेगा।
5. सिंह: सप्तम भाव में यह योग वैवाहिक जीवन में तनाव दे सकता है। पार्टनरशिप के बिजनेस में सावधानी बरतें, लेकिन सार्वजनिक छवि में निखार आएगा।
6. कन्या: छठे भाव (रोग, ऋण, शत्रु) में यह योग आपको शत्रुओं पर विजय दिलाएगा। स्वास्थ्य का ध्यान रखें, विशेषकर पेट और नसों से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं।
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7. तुला: पंचम भाव (संतान, प्रेम, बुद्धि) में यह योग क्रिएटिव कामों में सफलता देगा। शेयर बाजार में बड़ा जोखिम न लें, प्रेम संबंधों में गलतफहमियां हो सकती हैं।
8. वृश्चिक: चतुर्थ भाव (सुख) में यह योग भूमि-भवन के लाभ दे सकता है, लेकिन माता के स्वास्थ्य और घर की शांति में कमी ला सकता है।
9. धनु: पराक्रम भाव में यह योग आपको साहसी बनाएगा। छोटी यात्राओं से लाभ होगा, लेकिन भाई-बहनों के साथ संबंधों में नरमी बरतें।
10. मकर: द्वितीय भाव (धन) में यह योग अचानक धन लाभ तो कराएगा, लेकिन कटु वाणी के कारण परिवार में विवाद की स्थिति बन सकती है। निवेश सोच-समझकर करें।
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11. कुंभ: आपकी ही राशि (प्रथम भाव) में यह संगम है। आप अत्यधिक ऊर्जावान महसूस करेंगे, लेकिन मानसिक उथल-पुथल रहेगी। भ्रम (राहु) और क्रोध (मंगल) से बचें।
12. मीन: द्वादश भाव (व्यय) में यह योग विदेशी लाभ दिला सकता है, लेकिन अस्पताल या कानूनी मामलों में खर्च बढ़ा सकता है। नींद की कमी महसूस हो सकती है।
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विशेष उपाय (सावधानी के लिए)
चूँकि कुंभ के स्वामी शनि देव अभी मीन राशि में हैं और कुंभ में राहु-मंगल की युति है, इसलिए "अंगारक दोष" जैसी स्थिति भी बन रही है। हनुमान चालीसा का पाठ करना इस समय सबसे उत्तम सुरक्षा कवच है। पक्षी और आवारा कुत्तों को भोजन कराएं।
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