शनि-मंगल संयोग से बन रहा उग्र योग, इस तारीख को होगा भारत पाकिस्तान युद्ध

In the picture, the sign of Saturn, Mars and Aries, in the caption, Saturn will wreak havoc in Mars' sign Aries.

Effect of Saturn in Aries on India pakistan war: शनि और मंगल का जब भी संयोग बना है तो देश या दुनिया में युद्ध का हालात बनते ही बनते हैं, लेकिन शनि ने जब भी मेष राशि में प्रवेश किया है तो देश और दुनिया के हालात बहुत बुरी तरह से बिगड़ गए हैं। इसका इतिहास उठाकर देख सकते है। अब बहुत जल्द ही शनि का गोचर मंगल की मेष राशि में होने वाला है। इसके चलते आशंका जताई जा रही है कि भारत और पाकिस्तान के बीच एक बड़ा युद्ध होने की संभावना प्रबल है।

 

1. शनि का मेष में गोचर काल:

वर्ष 2027 में शनि: वर्ष 2027 में 3 जून को शनि मेष राशि में गोचर करके वक्री होकर पुन: 20 अक्टूबर को मीन राशि में लौट आएंगे। इस बीच भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर रहेगा। 

 

वर्ष 2028 में शनि: फिर 23 फरवरी 2028, बुधवार को शनि ग्रह पुन: मेष राशि में लौटकर फिर पूरे वर्ष यहीं पर रहेंगे। यह वर्ष बहुत ही खतरनाक रहने वाला है। 

 

वर्ष 2029 में शनि: फिर 8 अगस्त 2029 में शनिदेव मेष से निकलकर वृषभ राशि में गोचर करेंगे और इसके बाद 5 अक्टूबर 2029 को पुन: मेष राशि में लौट आएंगे यहां पर वे 17 अप्रैल 2030 तक रहेंगे। इसके बाद एक नए युग का प्रारंभ होगा।

 

2. मेष राशि में शनि ग्रह का फल

नीच का शनि: शनि ग्रह जब भी मेष राशि में गोचर करते हैं तो वे नीच के होकर फल देते हैं। शनि जब मेष (अग्नि तत्व और मंगल की राशि) में होते हैं, तो वे 'नीच' के कहलाते हैं। यहां वे लोगों के अनुशासन की परीक्षा लेंगे और कर्मों का दंड देंगे। 

 

सत्ता संघर्ष: दुनिया भर में शासन प्रणालियों और नेतृत्व के विरुद्ध असंतोष बढ़ेगा है। सेना और पुलिस बल पर दबाव बढ़ेगा। जनता और शासन के बीच टकराव बढ़ता जाएगा।

 

युद्ध सेना पर होगा खर्च: वैसे तो अभी से ही दुनिया के देशों का सैन्य खर्च बढ़ गया है लेकिन 2027 में यह और भी बढ़ेगा और दो देशों के बीच युद्ध के नए मोर्चे खुलते जाएंगे।

 

भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध: शनि के मंगल की राशि मेष में जाते ही पाकिस्तान ऐसा कुछ करेगा जिसके चलते भारत को फिर से ऑपरेशन सिंदूर लॉन्च करना होगा लेकिन इस बार यह ऑपरेशन संपूर्ण वार में बदलने की संभावना प्रबल नजर आ रही है। 

 

3. शनि का मेष में जाने का इतिहास: 

प्रत्येक 30 साल के बाद शनि ग्रह मेष राशि में गोचर करते हैं। ढाई साल में मेष में रहकर ये युद्ध और विस्फोटक स्थिति को जन्म देते हैं या सत्ता परिवर्तन करवाते हैं। तूफान और भूकंप को भी जन्म देते हैं। शनि का जब भी मंगल के साथ किसी भी प्रकार से संयोग बना है तो किसी बड़े युद्ध को जन्म दिया है। शनि ने जब भी मेष राशि में गोचर किया है तब तब बड़े युद्ध हुए हैं।

 

  • 1999 का वर्ष मुख्य रूप से भारत-पाकिस्तान के बीच कारगिल युद्ध का था जब शनि मेष में था। 
  • 1969 में चीन और सोवियत सेना में झड़प हुई थी।
  • 1939 में विश्‍व युद्ध की शुरुआत: 1 सितंबर 1939 को जर्मनी ने पोलैंड पर आक्रमण किया, जो युद्ध का प्रमुख कारण बना।
  • 1909 का वर्ष भारत के प्रशासनिक सुधारों और क्रांतिकारी स्वतंत्रता संग्राम, दोनों के दृष्टिकोण से एक महत्वपूर्ण मोड़ था। इसी दौरान अमेरिका में 20,000 का विद्रोह हुआ था।
  • 1996-1998: इससे पहले, शनि 1990 के दशक के मध्य में मेष राशि से गुजरा था।
  • 1967-1969: इससे पूर्व यह गोचर 1960 के अंत में हुआ था।
  • 1937-1939: 100 साल के रिकॉर्ड के अनुसार, 1930 के दशक के अंत में भी शनि मेष राशि में था
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Edited by Aniruddha Joshi

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