
यह क्या होता है?
जब चंद्रमा अपनी कक्षा में घूमते हुए पृथ्वी और किसी दूर स्थित तारे (Star) या ग्रह (Planet) के बीच में आ जाता है, तो वह तारा या ग्रह चंद्रमा के पीछे छिप जाता है। इसी घटना को 'लूनर ऑकल्टेशन' कहा जाता है।
यह सूर्य ग्रहण (Solar Eclipse) जैसा ही है, बस अंतर यह है कि सूर्य ग्रहण में चंद्रमा सूर्य को ढकता है, जबकि ऑकल्टेशन में चंद्रमा किसी तारे या अन्य ग्रह को ढकता है।
यह कैसे काम करता है?
सीधी रेखा: पृथ्वी, चंद्रमा और वह तारा/ग्रह एक सीधी रेखा में आ जाते हैं।
ओझल होना (Disappearance): चंद्रमा के आगे बढ़ने पर तारा उसके एक किनारे से अचानक गायब हो जाता है।
पुनरागमन (Reappearance): कुछ समय बाद, तारा चंद्रमा के दूसरी ओर से वापस दिखाई देने लगता है।
आज (2 फरवरी 2026) का संदर्भ
आज चंद्रमा मघा नक्षत्र के सबसे चमकीले तारे Regulus (रेगुलस) को कवर करेगा। ज्योतिष शास्त्र में इसे महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि मघा नक्षत्र का स्वामी केतु है और इसका संबंध पितरों और शक्ति से है।
Regulus को 'शाही तारा' (Royal Star) कहा जाता है। जब चंद्रमा इसे ढकता है, तो माना जाता है कि यह सत्ता, राजनीति और नेतृत्व से जुड़े मामलों में बड़े बदलाव का संकेत देता है।
ऑकल्टेशन के प्रकार
Planetary Occultation: जब चंद्रमा मंगल, शुक्र या बृहस्पति जैसे किसी ग्रह को ढकता है।
Stellar Occultation: जब चंद्रमा किसी दूर स्थित तारे (जैसे आज का रेगुलस) को ढकता है।
Grazing Occultation: जब चंद्रमा का केवल किनारा किसी तारे को छूकर निकलता है, जिससे तारा बार-बार चमकता और बुझता हुआ दिखाई देता है।
खगोलीय महत्व:
वैज्ञानिक इस घटना का उपयोग चंद्रमा की सटीक स्थिति मापने और उन तारों के व्यास (Diameter) का पता लगाने के लिए करते हैं जो बहुत दूर हैं।
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