
1. पहला हनुमान साबर मंत्र:
"बिस्तर के आस-पास।
हवेली के आस-पास।
छप्पन सौ यादव।
लंका-सी कोट,
समुद्र-सी खाई।
राजा रामचंद्र की दुहाई।।"
मंत्र का प्रभाव: रात में सोते समय इस मंत्र को 3 बार पढ़कर सोने से किसी भी प्रकार की अलाबला, भूत-प्रेत, पशु पक्षी, जीन-जिनावर का भय या खतरा नहीं रहता है। निश्चिंतता से नींद आती है और बुरे सपने भी नहीं आते हैं। दरअसल, यह मंत्र सोने से पहले या किसी भी स्थान को सुरक्षित करने के लिए पढ़ा जाता है, जो तांत्रिक, नकारात्मक ऊर्जा, और प्रेत बाधा से रक्षा करता है।
2. दूसरा हनुमान साबर मंत्र:
ओम गुरुजी को आदेश गुरजी को प्रणाम,
धरती माता धरती पिता,
धरती धरे ना धीरबाजे श्रींगी बाजे तुरतुरि
आया गोरखनाथमीन का पुत् मुंज का छड़ा
लोहे का कड़ा हमारी पीठ पीछे यति हनुमंत खड़ा,
शब्द सांचा पिंड काचास्फुरो मन्त्र ईश्वरो वाचा।।
मंत्र का प्रभाव: इस मन्त्र को सात बार पढ़ कर चाकू से अपने चारों तरफ रक्षा रेखा खींच ले गोलाकार, स्वयं हनुमानजी साधक की रक्षा करते हैं। शर्त यह है कि मंत्र को सिद्ध करने के बाद विधि विधान से पढ़ा गया हो।
3. तीसरा हनुमान साबर अढाईआ मंत्र:-
ॐ नमो आदेश गुरु को,
सोने का कड़ा, तांबे का कड़ा
हनुमान वन्गारेय सजे मोंढे आन खड़ा ॥
मंत्र प्राभाव: किसी भी प्रकार का संकट होने पर इस पर तो 3 बार बोलने से हनुमानजी स्वयंत जातक की रक्षा करने आ जाएंगे।
4. चौथा हनुमान साबर (जंजीरा) मंत्र:
ॐ हनुमान पहलवान पहलवान, बरस बारह का जबान,
हाथ में लड्डू मुख में पान, खेल खेल गढ़ लंका के चौगान,
अंजनी का पूत, राम का दूत, छिन में कीलौ
नौ खंड का भूत, जाग जाग हड़मान (हनुमान)
हुंकाला, ताती लोहा लंकाला, शीश जटा
डग डेरू उमर गाजे, वज्र की कोठड़ी ब्रज का ताला
आगे अर्जुन पीछे भीम, चोर नार चंपे
ने सींण, अजरा झरे भरया भरे, ई घट
पिंड की रक्षा राजा रामचंद्र जी लक्ष्मण कुंवर हड़मान (हनुमान) करें।
मंत्र प्रभाव: इस मंत्र की सबसे बड़ी विशेषता इसके अंत में छिपी है: "ई घट पिंड की रक्षा राजा रामचंद्र जी लक्ष्मण कुंवर हड़मान करें।" इसका नियमित पाठ करने से शरीर के चारों ओर एक सुरक्षा घेरा बन जाता है, जिसे कोई भी नकारात्मक शक्ति भेद नहीं सकती। यह मंत्र किसी भी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा, नजर दोष, या प्रेत बाधा को तुरंत शांत करने की क्षमता रखता है। अगर किसी को सोते समय डरावने सपने आते हों या घर में नकारात्मकता महसूस होती हो, तो इसका पाठ रामबाण है। मन का डर खत्म होता है। इंसान के भीतर निर्भीकता पैदा होती है, जिससे वह कठिन परिस्थितियों का सामना आसानी से कर पाता है। यह शत्रुओं के षड्यंत्रों को विफल करने और कार्यों में आने वाली बाधाओं (जैसे व्यापार में घाटा या नौकरी में दिक्कत) को दूर करने में मदद करता है। साधक का शरीर और स्वास्थ्य वज्र की तरह मजबूत हो जाता है। पुराने समय में साधु-संत और पहलवान अपनी देह की रक्षा के लिए इस जंजीरा का प्रयोग करते थे।
5. पांचवां हनुमान साबर मंत्र:-
ॐ नमो बजर का कोठा,
जिस पर पिंड हमारा पेठा।
ईश्वर कुंजी ब्रह्म का ताला,
हमारे आठो आमो का जती हनुमंत रखवाला।
मंत्र प्रभाव: इसे पढ़ने से व्यक्ति के चारों ओर एक ऐसी सुरक्षा दीवार बन जाती है जिसे कोई भी मारण प्रयोग, तांत्रिक क्रिया या बुरी नजर भेद नहीं पाती। जिन लोगों को रात में अचानक डर लगता है, अंधेरे से भय लगता है या ऐसा महसूस होता है कि कोई उनका पीछा कर रहा है, उनके लिए यह मंत्र रामबाण है। यह मन को चट्टान की तरह मजबूत बनाता है। आठों प्रहर (24 घंटे) स्वयं यति (ब्रह्मचारी) हनुमान जी रक्षा करते हैं। इसे सुबह घर से निकलते समय पढ़ने से दुर्घटनाओं, आकस्मिक संकटों और अनहोनी से रक्षा होती है।
यहाँ इन पांचों शक्तिशाली शाबर मंत्रों के संक्षिप्त फायदे-
प्रथम मंत्र (स्थान सुरक्षा): यह मंत्र आपके शयन कक्ष और घर के चारों ओर एक अदृश्य अभेद्य दीवार खड़ी कर देता है, जिससे सोते समय बाहरी नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश रुक जाता है।
द्वितीय मंत्र (घेरा सुरक्षा): यह 'रक्षा कवच' बनाने के लिए सर्वोत्तम है; चाकू या उंगली से घेरा खींचकर बैठने पर साधना के दौरान कोई भी शक्ति आपको छू नहीं सकती।
तृतीय मंत्र (आकस्मिक सहायता): यह 'इमरजेंसी मंत्र' की तरह काम करता है; जब आप अचानक किसी बड़े संकट या जानलेवा स्थिति में फंस जाएं, तो यह हनुमान जी को तुरंत पुकारने का माध्यम है।
चतुर्थ मंत्र (शारीरिक वज्रता): यह 'जंजीरा' साधक के शरीर को भीतर से इतना मजबूत बना देता है कि उस पर शत्रु के षड्यंत्र, तंत्र और गंभीर रोगों का असर निष्प्रभावी हो जाता है।
पंचम मंत्र (यात्रा व कार्य सुरक्षा): यह 'सुरक्षित आवागमन' के लिए है; घर से निकलते समय इसे पढ़ने पर दुर्घटनाओं और अनहोनी से बचाव होता है, साथ ही व्यापारिक बाधाएं दूर होती हैं।
इन 5 कामों में मिलती है मदद
- शत्रु और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा
- अचानक आने वाले संकटों से बचाव
- रुके हुए कार्यों में सफलता
- भय और मानसिक तनाव से मुक्ति
- आत्मबल और साहस में वृद्धि
इस विधि से करें जप:
- हनुमान जी का पूजन करें तथा नैवेद्य लगाएं।
- घर पर हनुमानजी का कोई भी चित्र लाल कपड़े पर रखकर पूजन करें।
- पूजन में चंदन, सिन्दूर, अक्षत, कनेर, गुड़हल या गुलाब के पुष्प प्रयोग करें।
- नैवेद्य में मालपुआ, बेसन के लड्डू आदि लें तब आरती कर संकल्प लेकर अपनी समस्या के अनुसार मंत्र जप करें।
- पूर्वाभिमुख हो जप करें।
- रुद्राक्ष माला, ब्रह्मचर्य व लाल वस्त्रासन का प्रयोग करें।
- यथाशक्ति जप कर उपलब्ध साधनों से 1 माला हवन करें, मंत्र सिद्ध हो जाएगा।
- उपरांत नित्य 1 माला कार्य होने तक करें, बीच में बंद नहीं करें।
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