
ग्रहण की मुख्य बातें:
- ग्रहण दिनांक: 03 मार्च, मंगलवार
- ग्रहण शुरू: (Penumbral Phase)- दोपहर 02:14 बजे तक।
- आंशिक ग्रहण शुरू: (Partial Begins)- दोपहर 03:21 बजे तक।
- पूर्ण ग्रहण शुरू: (Totality Begins)- शाम 04:34 बजे तक।
- अधिकतम ग्रहण: (Maximum Eclipse)- शाम 05:03 बजे तक।
- पूर्ण ग्रहण समाप्त: (Totality Ends)- शाम 06:46 बजे तक।
- सूतककाल: (Sutak kaal)- सुबह 06:36 से शाम 06:46 बजे तक।
- सूर्य ग्रहण का सूतक काल 12 घंटे पहले और चंद्र ग्रहण का सूतक काल 9 घंटे पूर्व लग जाता है।
1. शुद्धिकरण एवं स्वच्छता (Purification)
ग्रहण के नकारात्मक प्रभाव को दूर करने के लिए घर और स्वयं की शुद्धि सबसे पहला कदम है:
घर की सफाई: पूरे घर की साफ-सफाई करें और वातावरण को पवित्र करने के लिए गंगाजल का छिड़काव करें।
स्नान: ग्रहण समाप्ति के बाद गंगा स्नान या पानी में औषधि मिलाकर स्नान करना चाहिए।
देव-शुद्धि: घर के मंदिर में भगवान की मूर्तियों को भी जल से स्नान कराकर उन्हें शुद्ध करना चाहिए।
2. खान-पान के नियम (Food & Water)
ग्रहण के दौरान और बाद में भोजन की शुद्धता बनाए रखना अनिवार्य माना गया है:
सामग्री का संरक्षण: ग्रहण लगने से पहले ही दूध, दही, घी, अचार, चटनी और मुरब्बा जैसी चीजों में कुशा या तुलसी दल डाल देना चाहिए ताकि वे दूषित न हों।
ताजा भोजन: ग्रहण के बाद पुराना भोजन न करें, बल्कि शुद्ध और ताजा भोजन बनाकर ही ग्रहण करें।
जल का सेवन: ग्रहण के पश्चात पानी में तुलसी दल डालकर ही उसे पीना चाहिए।
3. दान और पुण्य (Charity & Alms)
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण के बाद दान करने से कई गुना अधिक फल मिलता है:
जीव-जंतुओं की सेवा: स्नान के बाद गाय को घास खिलाना और पक्षियों को अन्न डालना शुभ होता है।
जरूरतमंदों की सहायता: गरीब या ब्राह्मण को अपनी सामर्थ्य अनुसार वस्त्र और अन्न का दान करना चाहिए।
विशेष दान (छाया दान): कांसे की कटोरी में घी भरकर और तांबे का सिक्का डालकर उसमें अपना मुंह देखकर दान करने से विशेष लाभ मिलता है।
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