मंगल-शनि की युति से बनेगा ज्वालामुखी योग, दुनिया में हो सकती हैं ये 5 बड़ी घटनाएं

Mangal shani yuti

ज्योतिषीय गणना के अनुसार, 23 फरवरी 2026 को मंगल और राहु की युति (अंगारक योग) के बाद अब एक और विस्फोटक स्थिति बनने जा रही है। 2 अप्रैल 2026 से 11 मई 2026 के बीच मंगल, बृहस्पति की राशि मीन में प्रवेश करेंगे, जहाँ शनि पहले से ही विराजमान हैं। शनि और मंगल की इस युति को ज्योतिष शास्त्र में 'ज्वालामुखी' या 'विस्फोटक योग' कहा जाता है।

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तत्वों का संघर्ष: आग, हवा और पानी का मिलन

इस खगोलीय घटना में तत्वों का एक जटिल मिश्रण देखने को मिलेगा:

1. मंगल (अग्नि तत्व): यह विस्फोट और युद्ध का कारक है।

2. शनि (वायु तत्व): शनि की हवा मंगल की आग को और भयंकर बनाने का कार्य करेगी।

3. मीन राशि (जल तत्व): चूँकि यह युति गुरु की जल प्रधान राशि में हो रही है, इसलिए यहाँ आग, पानी, तेल और हवा का एक दुर्लभ संयोग बनेगा।

4. ग्रह युद्ध योग: मीन राशि में मंगल और शनि एक ही डिग्री पर आ जाएंगे। जब दो शत्रु ग्रह एक ही राशि और एक ही डिग्री पर होते हैं, तो इसे 'ग्रह युद्ध' कहा जाता है, जो सत्ता और जनता के बीच भारी टकराव का संकेत है।

 

नक्षत्रों का प्रतिकूल प्रभाव

6 अप्रैल से 24 अप्रैल के बीच स्थिति और भी संवेदनशील हो जाएगी। इस दौरान मंगल और शनि दोनों एक ही 'उत्तराभाद्रपद' नक्षत्र में गोचर करेंगे। दो क्रूर और परस्पर शत्रु ग्रहों का एक ही राशि, एक ही नक्षत्र और एक ही डिग्री में होना वैश्विक शांति के लिए शुभ नहीं माना जाता। यह स्थिति आतंकी घटनाओं में वृद्धि की ओर इशारा करती है।

 

संभावित 5 बड़ी वैश्विक घटनाएं और प्रभाव

इस विस्फोटक योग के कारण दुनिया भर में निम्नलिखित पांच प्रमुख संकट देखे जा सकते हैं:

1. देशों के बीच युद्ध: दो राष्ट्रों के बीच चल रहा तनाव युद्ध में बदल सकता है, विशेषकर समुद्री क्षेत्रों में संघर्ष की प्रबल संभावना है।

2. आतंकवाद और अराजकता: वैश्विक स्तर पर आतंकवादी घटनाएं बढ़ सकती हैं और समाज में असुरक्षा का भाव पैदा होगा।

3. जनता और सरकार में टकराव: सरकार की नीतियों के विरुद्ध जनता में भारी आक्रोश देखने को मिलेगा, जिससे कई देशों में आंतरिक विद्रोह या उपद्रव जैसी स्थितियां बनेंगी।

4. महंगाई का तांडव: आवश्यक वस्तुओं की कीमतें बेकाबू हो सकती हैं, जिससे आम जनता की मुश्किलें बढ़ेंगी।

5. आर्थिक मंदी और बेरोजगारी: औद्योगिक क्षेत्र में भारी मंदी का खतरा मंडराएगा। इससे न केवल उद्योगों का विकास रुकेगा, बल्कि कर्मचारियों की नौकरियों पर भी संकट आ सकता है, जिससे आर्थिक ढांचा कमजोर होगा।

 



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