
02 मार्च को भद्राकाल में नहीं जलाते हैं होली:
02 मार्च की शाम को 05 बजकर 58 मिनट पर भद्रा काल प्रारंभ हो जाएगा। यही समय प्रदोष काल का भी रहेगा। इस काल में होलिका दहन करना अशुभ माना गया है। भद्रा का पुच्छ काल रात 01:25 से 02:35 तक रहेगा। इस समय होलिका दहन कर सकते हैं लेकिन भद्रा इस बार धरती लोक की है। धरती लोक की भद्रा में किसी भी प्रकार की पूजा पाठ नहीं करते हैं। शास्त्र कहते हैं कि यदि जरूरी नहीं हो तो अगले दिन होलिका दहन करें।
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03 मार्च को सूतक काल और ग्रहण में कैसे खेलें होली?
03 मार्च को प्रात: 09:36 से ही चंद्र ग्रहण का सूतक काल प्रारंभ हो जाएगा। इस काल में धुलेंडी का रंग डालना शास्त्र सम्मत नहीं माना गया है। इसलिए जब शाम को 06:46 पर चंद्र ग्रहण समाप्त हो जाए तब होलिका दहन करें और अगले दिन होली मनाएं। निर्णय सिंधु और धर्मसिंधु के अनुसार, यदि पहले दिन भद्रा का साया हो और दूसरे दिन पूर्णिमा प्रदोष काल से थोड़ा पहले समाप्त हो रही हो, तो भी दूसरे दिन भद्रा मुक्त समय को ही प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
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