
शनि दोष से मुक्ति का उपाय:
- हनुमान जी ने शनि देव को रावण के कारागार से मुक्त कराया था, जिससे प्रसन्न होकर शनि देव ने वचन दिया था कि जो भी हनुमान जी की पूजा करेगा, उस पर शनि का कुप्रभाव नहीं पड़ेगा। यदि आप शनि की साढ़ेसाती, ढैया या मंगल दोष से पीड़ित हैं, तो इस दिन ये उपाय अवश्य करें:-
- शनि भारी होने पर संकट मोचन हनुमान स्तोत्र का पाठ करें या 8 बार हनुमान चालीसा का पाठ करें।
- एक कटोरी में तेल लें व उसमें काली उड़द के चौदह दाने डालकर उस तेल में अपना चेहरा देखें। उसके उपरांत यह तेल हनुमान को चढ़ाएं।
- हनुमान जयंती की शाम को पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं और हनुमान जी को काली उड़द के 11 दाने चढ़ाएं।
मंगल दोष से मुक्ति का उपाय:
- हनुमान जी स्वयं मंगल ग्रह के अधिपति देव माने जाते हैं। हनुमान जयंती पर उनकी पूजा से मांगलिक दोष के कारण आने वाली अड़चनें दूर होती हैं।
- एक लाल कपड़े में लाल मसूर की दाल और गुड़ रखकर हनुमानजी को अर्पित करें।
- हनुमानजी को गुड़, मिश्री और चने का मिश्रण बनाकर प्रसाद अर्पित करें।
- इस दिन हनुमान जी को लाल चोला चढ़ाएं और लाल चंदन की माला से 'ॐ हं हनुमते नमः' मंत्र का जाप करें।
पितृदोष और कालसर्प दोष से मुक्ति का उपाय:
- हनुमानजी की नित्य पूजा करने से सभी तरह के भूत, पिशाच और पितृ दोषों से मुक्ति मिलती है।
- पितरों की मुक्ति के लिए भी हनुमानजी की विशेष पूजा करते हैं।
- सभी तरह के कालसर्पदोष से हनुमानजी मुक्त करते हैं। यह एक तरह का बंधन है। हनुमानजी की पूजा से यह बंधन कट जाता है।
- घर में सामूहिक रूप से या स्वयं सुंदरकांड का पाठ करने से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है और ग्रहों की प्रतिकूलता खत्म होती है। इसी के साथ ही सभी तरह के कालसर्पदोष और पितृदोष से मुक्ति मिलती है।
इन बातों का रखें विशेष ध्यान (नियम और सावधानी)
- हनुमान जी की पूजा में शुचिता और नियमों का पालन अनिवार्य है:
- ब्रह्मचर्य: हनुमान जयंती के दिन पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करें।
- सात्विकता: इस दिन तामसिक भोजन (प्याज, लहसुन, मांस-मदिरा) से पूरी तरह दूर रहें।
- पवित्र मन: किसी के प्रति क्रोध या द्वेष की भावना न रखें, केवल राम नाम का जप करें।
हनुमान जयंती 2026: पूजन की सरल विधि
हनुमान जयंती के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर प्रभु श्री राम और हनुमान जी का स्मरण करें। पूजा के लिए निम्नलिखित विधि अपनाएं:
स्वच्छता का ध्यान: स्नान आदि से निवृत्त होकर लाल या पीले रंग के स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
स्थापना: एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर हनुमान जी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। उनके साथ श्री राम-सीता की तस्वीर अवश्य रखें।
अभिषेक और सिंदूर: हनुमान जी को गंगाजल से स्नान कराएं और फिर उन्हें चमेली के तेल में मिला हुआ सिंदूर अर्पित करें। यह उन्हें अत्यंत प्रिय है।
प्रसाद: उन्हें बूंदी के लड्डू, बेसन के लड्डू या शुद्ध घी से बना चूरमा अर्पित करें। भोग में तुलसी दल (पत्ता) जरूर रखें, क्योंकि तुलसी के बिना हनुमान जी भोग ग्रहण नहीं करते।
पाठ और मंत्र: आसन पर बैठकर हनुमान चालीसा, बजरंग बाण या सुंदरकांड का पाठ करें।
आरती: अंत में कपूर जलाकर 'आरती कीजे हनुमान लला की' गाएं।
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