बंगाल में नरेंद्र मोदी या ममता बनर्जी, क्या कहते हैं जानेमाने ज्योतिष?

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Bengal Election Astrological Predictions: बंगाल की राजनीतिक बिसात पर इस समय सबकी नजरें टिकी हैं। चुनावी शोर थमने के बाद अब सारा दारोमदार ग्रहों की चाल और नक्षत्रों के समीकरणों पर आ गया है। 04 मई को आने वाले परिणामों से पहले ज्योतिष जगत में सुगबुगाहट तेज है। आइए, एक नए नजरिए से समझते हैं कि आखिर ब्रह्मांड के सितारे बंगाल की सत्ता की चाबी किसे सौंपने का संकेत दे रहे हैं।

 

ग्रहों की चाल: मोदी का 'मंगल' बनाम ममता का 'शनि'

ज्योतिषीय दृष्टिकोण से देखा जाए तो यह मुकाबला केवल दो नेताओं के बीच नहीं, बल्कि दो अलग-अलग ग्रह दशाओं के बीच है।

 

ममता बनर्जी: चुनौतियों का चक्रव्यूह

ममता बनर्जी की कुंडली का सूक्ष्म विश्लेषण बताता है कि वर्तमान में वे शनि और राहु के दोहरे प्रभाव से गुजर रही हैं। शनि का गोचर उन्हें मानसिक रूप से अशांत रख सकता है और अपनों से मिलने वाला 'भरोसे का संकट' उनकी राह मुश्किल बना रहा है। ग्रहों की स्थिति संकेत दे रही है कि उनकी वाणी (बुध के मीन राशि में होने के कारण) विवादों का कारण बन सकती है। सितारों की मानें तो इस समय उन्हें राजनीति के साथ-साथ स्वास्थ्य पर भी विशेष ध्यान देने की जरूरत है। हालांकि ममता बनर्जी की जन्मकुंडली बहुत स्ट्रांग है जो बाजी पलट सकती है।

 

नरेंद्र मोदी: पराक्रम का उदय

दूसरी ओर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कुंडली में मंगल अत्यंत प्रभावी और बलवान स्थिति में गोचर कर रहा है। ज्योतिष शास्त्र में मंगल को साहस, ऊर्जा और विजय का कारक माना जाता है। उनकी कुंडली की यह मजबूती उन्हें एक अपराजेय योद्धा के रूप में पेश कर रही है, जो बंगाल के दुर्ग को फतह करने के लिए प्रबल दावेदार नजर आ रहे हैं।

 

दिग्गज ज्योतिषियों का विश्लेषण: क्या होगा सत्ता परिवर्तन?

देश के जाने-माने भविष्यवक्ताओं ने ग्रहों के गोचर और राजनीतिक इतिहास को जोड़कर जो निष्कर्ष निकाले हैं, उनमें से अधिकांश एक बड़े बदलाव की ओर इशारा कर रहे हैं:

 

एस्ट्रो शर्मिष्ठा और ज्योतिष वरुण प्रकाश: इन दोनों विशेषज्ञों का मानना है कि ममता बनर्जी के लिए यह समय पराजय के योग बना रहा है। उनके अनुसार, भाजपा सत्ता की दहलीज पार कर सकती है, हालांकि नई सरकार के शुरुआती ढाई साल काफी उतार-चढ़ाव भरे रहने की संभावना है।

 

संजीव आनंद (Astro SantJi) और निशांत राजवंशी: इन्होंने बाकायदा सीटों का गणित भी सामने रखा है। इनके विश्लेषण के अनुसार, भाजपा 150 से 162 सीटों के बीच हासिल कर प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बना सकती है।

 

संत बेत्रा: इनका तर्क है कि बंगाल की अपनी कुंडली और वर्तमान मुख्यमंत्री की राशि पर शनि-राहु का नकारात्मक प्रभाव 'सत्ता परिवर्तन' की पटकथा लिख रहा है, लेकिन यह बहुत कम अंतर से होगा।

 

अन्य ज्योतिष: इसके अलावा सुरेश कौशल, अरविंद त्रिपाठी, आचार्य रीना शर्मा और आचार्य शैलेश तिवारी जैसे विद्वानों ने भी मोदी की 'मंगल दशा' को जीत का मुख्य आधार बताया है। उनके अनुसार, ग्रहों का यह तालमेल भाजपा के पक्ष में एक मजबूत लहर पैदा कर रहा है।

 

विपरीत मत: क्या 'दीदी' का किला अभेद्य रहेगा?

हालांकि ज्योतिष के आकाश में एक पक्ष भाजपा की जीत देख रहा है, वहीं कुछ अन्य भविष्यवक्ताओं का तर्क इससे बिल्कुल अलग है। इन विश्लेषकों का मानना है कि ममता बनर्जी की कुंडली में मौजूद राजयोग अभी समाप्त नहीं हुआ है। उनकी गणना के अनुसार, 'दीदी' की कुंडली अभी भी अत्यंत शक्तिशाली है और वे 160 से 175 सीटें जीतकर एक बार फिर सत्ता में शानदार वापसी कर सकती हैं।

 

निष्कर्ष

ज्योतिष केवल संभावनाओं का शास्त्र है। जहाँ बहुसंख्यक ज्योतिषी सत्ता परिवर्तन और भाजपा की जीत की भविष्यवाणी कर रहे हैं, वहीं कुछ धड़े ममता बनर्जी की मजबूत वापसी पर अडिग हैं। हार-जीत का असली फैसला तो ईवीएम में बंद हो चुका है, जिसका खुलासा 4 मई को होगा। फिलहाल, ग्रहों की इस जंग ने जनता की उत्सुकता को चरम पर पहुंचा दिया है।



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