
खप्पर योग क्या होता है और यह क्यों बना है?
ज्योतिष शास्त्र में खप्पर योग को एक अत्यंत उग्र और अशुभ योग माना जाता है। इस साल इसके बनने के मुख्य कारण ये हैं:
महीनों में दिनों का संयोग: मई 2026 के महीने में 5 शनिवार और 5 रविवार पड़ रहे हैं, वहीं जून 2026 में 5 मंगलवार आ रहे हैं। जब किसी महीने में ऐसे क्रूर या उग्र दिनों की संख्या 5 हो जाती है, तो खप्पर योग का निर्माण होता है।
ग्रहों की स्थिति: इस दौरान सूर्य, मंगल, शनि और राहु जैसे उग्र ग्रहों की विशेष स्थितियां और गोचर भी इस योग को बढ़ावा दे रहे हैं।
अमावस्या और संक्रांति: 15 जून 2026 को सोमवती अमावस्या के ही दिन मिथुन संक्रांति (सूर्य का मिथुन राशि में प्रवेश) हो रही है, जिसे ज्योतिष में खप्पर योग को और मजबूत करने वाला माना गया है।
खप्पर योग का प्रभाव:
इसे आमतौर पर 'अशुभ योग', 'विस्फोटक योग', या 'संकट योग' के रूप में भी समझा जाता है, जो भीषण युद्ध, आगजनी, भीषण जनहानि, भूकंप, नरसंहार या तेल/गैस की कीमतों में तेजी जैसी स्थितियों को जन्म देता है। माता काली के हाथों में आपने खप्पर देखा ही होगा। इस खप्पर में खून भरकर माता इसे पीती है। ज्योतिषियों के अनुसार 11 मई से लेकर दिसंबर का समय विचित्र हो सकता है, जिसमें होने वाली घटनाओं से दुनिया को हैरानी हो सकती है। इसमें प्राकृतिक आपदाओं, महामारी, युद्ध और दंगों के कारण देश को बड़ी आर्थिक और जनहानि का सामना करना पड़ सकता है। इस खप्पर योग ने देश ही नहीं दुनिया में भी तबाही मचा रखी है।
खप्पर योग से 4 राशियों पर नकारात्मक प्रभाव:
1. मिथुन राशि:
समस्या: निर्णय लेने में परेशानी, काम का अचानक रुकना और आर्थिक नुकसान की आशंका।
सावधानी: निवेश और उधार से बचें, मानसिक शांति के लिए ध्यान करें और कागजात ध्यान से पढ़ें।
2. कन्या राशि:
समस्या: पुरानी या नई बीमारियां उभरना और कार्यक्षेत्र में गुप्त शत्रुओं द्वारा छवि बिगाड़ने की कोशिश।
सावधानी: सेहत के प्रति सतर्क रहें, योजनाओं को गुप्त रखें और किसी पर अंधविश्वास न करें।
3. मकर राशि:
समस्या: ऑफिस में अधिकारियों से विवाद, काम का श्रेय न मिलना और घर में क्लेश।
सावधानी: धैर्य रखें, कार्यक्षेत्र का तनाव घर न लाएं और बहस की स्थिति में चुप रहें।
4. मीन राशि:
समस्या: भ्रम के कारण गलत फैसले, अनियोजित खर्चों में बढ़ोतरी और वाणी के कारण रिश्तों में खटास।
सावधानी: महत्वपूर्ण फैसले अभी टाल दें, बजट का ध्यान रखें और सोच-समझकर बोलें।
इस दौरान क्या सावधानियां रखें?
कोई भी नया या बड़ा मांगलिक कार्य, नया व्यापार या भारी निवेश शुरू करने से बचें।
वाद-विवाद और कोर्ट-कचहरी के मामलों से दूर रहें, क्योंकि इस समय गुस्सा जल्दी आ सकता है।
वाहन चलाते समय और यात्रा करते समय विशेष सावधानी बरतें।
मानसिक शांति और नकारात्मक प्रभाव से बचने के लिए हनुमान चालीसा का पाठ, भगवान शिव की आराधना या दान-पुण्य करना बेहद लाभदायक माना जाता है।
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