
Purushottam Maas Spiritual Significance: पुरुषोत्तम मास हिन्दू पंचांग में एक अत्यंत शुभ और विशेष मास माना जाता है। इसे अधिक मास या Adhik Maas के समान ही महत्त्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इस दौरान किए जाने वाले व्रत, पूजा और दान का फल सामान्य मासों की तुलना में कई गुना अधिक होता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस मास में भगवान विष्णु की भक्ति और पूजा से व्यक्ति के पाप नष्ट होते हैं और जीवन में सुख, समृद्धि और शांति आती है।ALSO READ: साल में 2 बार क्यों आता है खरमास? जानिए मलमास, अधिकमास और पुरुषोत्तम मास का रहस्य
वर्ष 2026 में 17 मई से 15 जून तक पुरुषोत्तम/ अधिकमास होने के कारण इस वर्ष ज्येष्ठ का महीना लगभग साठ (60) दिनों का होगा। इस मास का मुख्य उद्देश्य आत्मा और परमात्मा के बीच संबंध को मजबूत करना है। इस दौरान किए जाने वाले अनुष्ठान, व्रत और दान का महत्व बहुत अधिक है। पुरुषोत्तम मास में भगवान विष्णु की विशेष आराधना, दान-पुण्य, और सत्य और धर्म के मार्ग पर चलना अत्यंत लाभकारी माना जाता है।
यहां पुरुषोत्तम मास के महात्म्य/ महिमा के संबंध में मुख्य 7 बिंदु दिए गए हैं:
1. इसका नाम 'पुरुषोत्तम' कैसे पड़ा?
प्राचीन मान्यताओं के अनुसार, भारतीय काल गणना में सूर्य और चंद्र मास के बीच सामंजस्य बिठाने के लिए हर तीसरे वर्ष एक अतिरिक्त महीना जुड़ता है। पहले इसे 'मलमास' (मैल वाला मास) कहकर त्याज्य माना जाता था क्योंकि इसमें कोई देवता अधिपति नहीं थे।
तब भगवान विष्णु ने इस मास को अपना स्वयं का नाम 'पुरुषोत्तम' दिया और कहा—
'जो फल अन्य महीनों में कठिन तपस्या से मिलता है, वह इस मास में केवल भक्ति और दान से प्राप्त होगा। इस मास का स्वामी मैं स्वयं हूं।'
2. आध्यात्मिक एवं धार्मिक महत्व
इस मास की महिमा अपरंपार है क्योंकि यह पूरी तरह 'अध्यात्म' को समर्पित है:
पुण्य की अनंतता: मान्यता है कि इस मास में किया गया एक छोटा सा शुभ कार्य (जैसे जप या दीपदान) सामान्य समय की तुलना में हजार गुना अधिक फल देता है।
पापों का शमन: इस माह में पवित्र नदियों में स्नान और श्रीमद्भागवत कथा के श्रवण से जाने-अनजाने में हुए पापों से मुक्ति मिलती है।
मोक्ष की प्राप्ति: जो साधक इस मास में पूर्ण सात्विकता और भक्ति के साथ व्रत रखते हैं, उन्हें मरणोपरांत वैकुंठ धाम (विष्णु लोक) की प्राप्ति होती है।
3. '33' के अंक का विशेष महत्व
पुरुषोत्तम मास में '33' की संख्या को अत्यंत पवित्र माना गया है। महात्म्य के अनुसार:
इस मास में 33 मालपुआ का दान करने का विधान है।
ये 33 मालपुए 33 देवताओं (12 आदित्य, 8 वसु, 11 रुद्र, 1 प्रजापति और 1 वषट्कार) के प्रतीक माने जाते हैं।
दान के समय 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का उच्चारण करने से दरिद्रता का नाश होता है।ALSO READ: पुरुषोत्तम मास का पौराणिक महत्व और कथा
4. वैज्ञानिक और मनोवैज्ञानिक दृष्टि
केवल धार्मिक ही नहीं, इस मास का व्यावहारिक महत्व भी है:
आत्म-मंथन का समय: चूंकि इस महीने में विवाह या गृह-प्रवेश जैसे सांसारिक उत्सव नहीं होते, इसलिए यह समय व्यक्ति को अपनी अंतरात्मा की ओर मुड़ने, ध्यान लगाने और मानसिक शांति प्राप्त करने का अवसर देता है।
स्वास्थ्य लाभ: इस दौरान व्रत और सात्विक आहार लेने से शरीर का शुद्धिकरण (Detoxification) होता है, जो बदलते मौसम के अनुकूल शरीर को तैयार करता है।
5. मुख्य कथा का सार
पुरुषोत्तम मास के महात्म्य में राजा दृढ़धन्वा और अग्निदेव की कथाएं आती हैं, जहां यह बताया गया है कि कैसे एक अहंकारी व्यक्ति भी इस मास के नियमों का पालन कर परम पद को प्राप्त कर सकता है। यह मास सिखाता है कि ईश्वर की शरण में आने पर 'मैल' (मलमास) भी 'अमृत' (पुरुषोत्तम) बन जाता है।
6. पुरुषोत्तम मास का मूल संदेश
'न जातु कामान्न भयान्न लोभात्, धर्मं त्यजेज्जीवितस्यापि हेतोः।'
(अर्थात: काम, भय या लोभ के कारण कभी धर्म का त्याग नहीं करना चाहिए।) यह मास हमें अपने कर्तव्यों और ईश्वर के प्रति समर्पण की याद दिलाता है।
अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।ALSO READ: Purushottam Maas 2026: पुरुषोत्तम मास में क्या करें और क्या नहीं?
from ज्योतिष https://ift.tt/Al8eH5N
EmoticonEmoticon