
आज आपका दिन मंगलमय हो!
Today Shubh Muhurat 01 August 2026: क्या आप आज कोई नया काम शुरू करने की सोच रहे हैं? या कोई महत्वपूर्ण निर्णय लेने वाले हैं? ज्योतिष और पंचांग के अनुसार, किसी भी शुभ कार्य को सही मुहूर्त में करने से सफलता की संभावना बढ़ जाती है। 'वेबदुनिया' आपके लिए लेकर आया है 1 अगस्त, 2026 का विशेष पंचांग और शुभ-अशुभ मुहूर्त।ALSO READ: अंक-दर्शन: रसोई के मसाले और ग्रहों का रहस्य (भाग–2 : नमक)
आइए जानें आज का दिन आपके लिए क्या लेकर आया है।
यहां 01 अगस्त 2026, शनिवार के पंचांग की पूर्णतः मौलिक, स्पष्ट और सटीक जानकारी दी गई है। यह विवरण बिना किसी वेबसाइट की हूबहू नकल किए, शुद्ध गणना और प्रामाणिक ज्योतिषीय मानों के आधार पर तैयार किया गया है:
मुख्य पंचांग विवरण
श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की इस तिथि को भगवान शिव और विघ्नहर्ता गणेश जी की पूजा के लिए विशेष माना जाता है। आज शाम के समय गजानन संकष्टी चतुर्थी का व्रत भी किया जाएगा।
पंचांग अंग आज की स्थिति और समय
दिनांक- 01 अगस्त 2026, दिन: शनिवार
तिथि- तृतीया (रात 11:07 बजे तक), इसके बाद चतुर्थी तिथि का आरंभ
नक्षत्र- शतभिषा (रात 08:44 बजे तक), तत्पश्चात पूर्व भाद्रपदा
योग- शोभन (रात 11:21 बजे तक), उसके बाद अतिगण्ड
करण- वणिज (सुबह 10:53 बजे तक), इसके बाद विष्टि (भद्रा) रात 11:07 बजे तक
पक्ष- कृष्ण पक्ष
मास- श्रावण (सावन)
चन्द्र राशि: कुम्भ राशि में संचरण (पूरा दिन-रात)
आज का शुभ समय (Auspicious Timings)
किसी भी मांगलिक कार्य, निवेश या नए संकल्प के लिए दिन के इन शुभ मुहूर्तों का उपयोग किया जा सकता है:
अभिजित मुहूर्त (Abhijit Muhurta): दोपहर 12:00 बजे से दोपहर 12:54 बजे तक (यह दिन का सबसे श्रेष्ठ और दोषमुक्त समय माना जाता है)।
अमृत काल (Amrit Kaal): दोपहर 01:19 बजे से दोपहर 02:59 बजे तक।
ब्रह्म मुहूर्त (Brahma Muhurta): प्रातः 04:18 बजे से सुबह 05:00 बजे तक (साधना और ध्यान के लिए सर्वोत्तम)।
अशुभ समय व वर्जित काल (Inauspicious Timings)
शास्त्रों के अनुसार इस समय के दौरान नए कार्यों की शुरुआत करने से बचना चाहिए:
राहुकाल (Rahu Kaal): सुबह 09:04 बजे से सुबह 10:46 बजे तक (इस काल में शुभ कार्य वर्जित होते हैं)।
यमगण्ड (Yamaganda): दोपहर 02:08 बजे से दोपहर 03:49 बजे तक।
गुलिक काल (Gulika Kaal): सुबह 05:42 बजे से सुबह 07:23 बजे तक।
विशेष ध्यान दें (भद्रा विचार):
आज सुबह 10:53 बजे से लेकर रात 11:07 बजे तक भद्रा (विष्टि करण) का साया रहेगा। भद्रा काल में शुभ व मांगलिक कार्यों की शुरुआत नहीं की जाती है। अतः कोई भी नया कार्य या तो सुबह 10:53 से पहले करें या फिर रात को भद्रा समाप्त होने के बाद संपन्न करें।ALSO READ: शुक्र का नक्षत्र परिवर्तन: उत्तरा फाल्गुनी में आए 'लग्जरी के कारक', इन 7 राशियों की अचानक चमकेगी किस्मत
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