आषाढ़ गुप्त नवरात्रि की तृतीय देवी माता त्रिपुर सुंदरी, जानिए पूजा विधि

The image depicts the worship of Mata Tripura Sundari, the third Goddess, during the Ashadha Gupta Navratri of 2026

Gupt Navratri Third Goddess Worship: आषाढ़ गुप्त नवरात्रि के तीसरे दिन तृतीय महाविद्या माता त्रिपुर सुंदरी (षोडशी महाविद्या) की साधना की जाती है। इन्हें मां ललिता या राजराजेश्वरी भी कहा जाता है। तंत्र शास्त्र में मां त्रिपुर सुंदरी को साक्षात् ब्रह्मांड की अधिष्ठात्री देवी माना गया है।ALSO READ: Ashadha Gupt Navratri 2026: आषाढ़ माह की गुप्त नवरात्रि पर व्रत करने के 5 खास नियम और फायदे

'त्रिपुर' का अर्थ है तीनों लोक यानी आकाश, पाताल और धरती या तीनों गुण- सत्व, रज, तम- और मां इन सबमें सबसे सुंदर और सर्वोच्च हैं। त्रिपुर सुंदरी का स्वरूप दिव्य और सौम्य हैं। वे सिंह के आसन पर विराजमान हैं, उनके हाथों में पाश, अंकुश, धनुष और बाण हैं, जो मन और इंद्रियों को नियंत्रण में रखने के प्रतीक हैं। मां त्रिपुर सुंदरी की साधना जीवन में परम आनंद, ऐश्वर्य, सौंदर्य, और मोक्ष की प्राप्ति के लिए की जाती है। वे साधक के जीवन से दरिद्रता और दुखों का पूरी तरह नाश कर देती हैं।

 

मां त्रिपुर सुंदरी की साधना का महत्व

भोग और मोक्ष दोनों की प्राप्ति: आमतौर पर साधनाओं में या तो सांसारिक सुख (भोग) मिलता है या आध्यात्मिक उन्नति (मोक्ष)। लेकिन मां त्रिपुर सुंदरी की साधना ऐसी है जो साधक को इस संसार के सभी भौतिक सुख-ऐश्वर्य भी देती है और अंत में मोक्ष का मार्ग भी प्रशस्त करती है।

 

गृहस्थ जीवन में सुख: जो लोग पारिवारिक समस्याओं या दांपत्य जीवन में तनाव से जूझ रहे हैं, उनके लिए मां ललिता की पूजा अत्यंत शांतिदायक होती है।

 

शारीरिक और मानसिक सौंदर्य: इनकी कृपा से साधक का व्यक्तित्व आकर्षक होता है, वाणी में मधुरता आती है और आत्मविश्वास बढ़ता है।

 

मां त्रिपुर सुंदरी की सात्विक पूजा विधि

 

गुप्त नवरात्रि के तीसरे दिन माता की आराधना अत्यंत पवित्र मन और सुंदर सामग्रियों के साथ की जाती है। इसकी पूजा विधि इस प्रकार है:

 

पवित्रता और सुंदर वस्त्र

प्रातः काल या संध्या काल में स्नानादि से निवृत्त होकर लाल, पीले या गुलाबी रंग के स्वच्छ वस्त्र धारण करें। चूंकि मां सौंदर्य की देवी हैं, इसलिए पूजा स्थान को भी फूलों और रंगोली से सुंदर तरीके से सजाएं।ALSO READ: आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2026: 9 दिनों में किस देवी की करें पूजा? जानें हर दिन का महत्व और लाभ

 

यंत्र या चित्र की स्थापना

एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर मां त्रिपुर सुंदरी का चित्र स्थापित करें। यदि आपके पास श्रीयंत्र है, तो उसे अवश्य स्थापित करें, क्योंकि मां ललिता साक्षात् श्रीयंत्र में वास करती हैं।

 

सामग्री और श्रृंगार

माता को अक्षत, कुमकुम, चंदन और लाल रंग की सामग्रियां- जैसे लाल रंग के पुष्प, गुलाब या लाल कनेर अर्पित करें। मां को सुहाग की सामग्रियां- चूड़ियां, बिंदी, सिंदूर चढ़ाना अत्यंत शुभ माना जाता है। घी का दीपक और सुगंधित धूप जलाएं।

 

मंत्र जाप और ललिता सहस्रनाम

फिर मां के सम्मुख बैठकर एकाग्र मन से रुद्राक्ष या स्फटिक की माला से उनके विशेष मंत्रों का जाप करें। इस दिन 'ललिता सहस्रनाम' या 'ललिता त्रिशती' का पाठ करना अद्भुत फल देता है।

 

मां त्रिपुर सुंदरी के सिद्ध मंत्र

मां त्रिपुर सुंदरी की कृपा के लिए इस सरल मंत्र का जाप किया जा सकता है: 'ॐ ऐं ह्रीं श्रीं त्रिपुर सुंदर्यै नमः'। तथा तंत्र साधना में उनका सबसे प्रसिद्ध तीन अक्षरों का बीज मंत्र 'ॐ ऐं क्लीं सौः है। 

 

भोग, आरती और समर्पण

मां को पूर्ण श्रद्धा के साथ पंचामृत, मखाने की खीर या सफेद रंग की मिठाइयों का भोग लगाएं। इसके बाद मां की आरती गाएं और सुखी व समृद्ध जीवन की प्रार्थना करते हुए पूजा संपन्न करें।

 

शास्त्रों के अनुसार इनकी कृपा से साधक को सांसारिक सुखों के साथ-साथ आत्मिक उन्नति भी प्राप्त होती है। तंत्र साधना में माता त्रिपुर सुंदरी का स्थान अत्यंत उच्च माना गया है और गुप्त नवरात्रि के दौरान इनकी पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है।

 

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