
Gupt Navratri Panchami Worship: आषाढ़ गुप्त नवरात्रि तांत्रिक साधना, शक्ति उपासना और दस महाविद्याओं की आराधना का विशेष पर्व माना जाता है। इस नवरात्रि में प्रत्येक दिन एक विशेष शक्ति स्वरूप की पूजा का विधान है। इसीलिए गुप्त नवरात्रि में दस महाविद्याओं की साधना की जाती है, और आषाढ़ गुप्त नवरात्रि के पांचवें दिन यानी पंचमी तिथि की अधिष्ठात्री देवी मां त्रिपुर भैरवी हैं।ALSO READ: गुंडिचा मंदिर क्यों है जगन्नाथ रथयात्रा का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव? जानिए 5 खास बातें
इन्हें 'भैरवी' इसलिए कहा जाता है क्योंकि ये तमोगुण और ब्रह्मांड के विनाशक तत्वों को नियंत्रित करती हैं, लेकिन अपने भक्तों के लिए वे अभय वरदान देने वाली करुणामयी मां हैं। मां त्रिपुर भैरवी का स्वरूप अत्यंत ओजस्वी, विनाशक और साथ ही भक्तों के लिए परम कल्याणकारी माना गया है। इनकी कृपा से साधक के भय, नकारात्मक ऊर्जा, शत्रु बाधा तथा मानसिक अशांति दूर होती है और जीवन में आत्मविश्वास तथा सफलता का मार्ग प्रशस्त होता है। मान्यता है कि गुप्त नवरात्रि की पंचमी तिथि पर विधि-विधान से मां त्रिपुर भैरवी की पूजा करने से साधना शीघ्र सिद्ध होती है, मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
आइए जानते हैं मां त्रिपुर भैरवी का स्वरूप, उनकी पूजा विधि और महत्व...
मां त्रिपुर भैरवी का स्वरूप
माता का रंग उदीयमान सूर्य यानी सुबह के लाल सूर्य की तरह लाल है। उनके चार हाथ हैं, जिनमें वे विद्या/ ज्ञान, वरद मुद्रा, अभय मुद्रा और एक माला धारण किए हुए हैं। मां त्रिपुर भैरवी के तीन नेत्र हैं और वे मस्तक पर अर्धचंद्र धारण करती हैं। लाल वस्त्र और लाल फूलों की माला माता को अत्यंत प्रिय है।
साधना का महत्व
मां त्रिपुर भैरवी की पूजा करने से व्यक्ति के भीतर का डर, डिप्रेशन और मानसिक तनाव पूरी तरह खत्म हो जाता है। यह साधना कोर्ट-कचहरी के मामलों में विजय दिलाने, शत्रुओं के प्रभाव को कम करने और वाक-सिद्धि प्राप्त करने के लिए अचूक मानी जाती है। गृहस्थ जीवन में आ रही बाधाएं भी इस पूजा से दूर होती हैं।
गुप्त नवरात्रि की पूजा आधी रात या निशिथ काल में करना सबसे ज्यादा फलदायी माना जाता है, हालांकि गृहस्थ लोग इसे सुबह भी कर सकते हैं। पूजा की सरल और सटीक विधि इस प्रकार है:
पंचमी तिथि की विशेष पूजा विधि
1. सुबह या मध्यरात्रि स्नान करके साफ लाल रंग के वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल का शुद्धिकरण करें, फिर गंगाजल छिड़कें। हाथ में जल और अक्षत लेकर मां त्रिपुर भैरवी की पूजा का संकल्प लें।ALSO READ: भगवान जगन्नाथ की मौसी कौन हैं? जानिए रथयात्रा से जुड़ी यह रोचक परंपरा
2. लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं। उस पर कलश और मां त्रिपुर भैरवी की तस्वीर या यंत्र स्थापित करें। यदि तस्वीर न हो, तो मां दुर्गा की प्रतिमा के सामने ही उनका ध्यान करें। माता के सम्मुख घी का दीपक और धूप जलाएं।
3. माता को लाल रंग की सामग्री- जैसे कुमकुम, सिंदूर, लाल चंदन और अक्षत चढ़ाएं। उन्हें लाल रंग के फूल- विशेषकर गुड़हल या गुलाब अर्पित करें और लाल फलों का भोग लगाएं।
4. शांत चित्त होकर कमल गट्टे या रुद्राक्ष की माला से माता के विशेष मंत्र- 'ॐ ह्रीं भैरवी क्लौं ह्रीं स्वाहा॥' का कम से कम 108 बार/ एक माला जाप करें।
5. जाप पूरा होने के बाद कपूर या घी के दीपक से मां की आरती उतारें। पूजा के समापन पर पूजा में हुई किसी भी अनजानी भूल के लिए हाथ जोड़कर माता से क्षमा याचना करें और अपना मनोरथ कहें।
6. पंचमी तिथि के दिन मां त्रिपुर भैरवी को खीर, शहद, हलवा या लाल रंग की मिठाइयों का भोग लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है।
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि की पंचमी तिथि मां त्रिपुर भैरवी की साधना के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है। इस दिन विधिपूर्वक पूजा, मंत्र जाप और आराधना करने से साधक को साहस, आत्मबल, आध्यात्मिक ऊर्जा तथा जीवन की बाधाओं से मुक्ति प्राप्त होती है। मां त्रिपुर भैरवी अपने भक्तों को निर्भयता, सफलता और दिव्य शक्ति का आशीर्वाद प्रदान करती हैं।
अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।ALSO READ: आषाढ़ गुप्त नवरात्रि की चतुर्थी की देवी मां भुवनेश्वरी, जानिए पूजा विधि
from ज्योतिष https://ift.tt/RL03HbB
EmoticonEmoticon