
Gupt Navratri Day 7: इन दिनों आषाढ़ गुप्त नवरात्रि जारी है और नवरात्रि के सातवें दिन महाविद्या मां धूमावती की पूजा की जाती है। मां धूमावती का स्वरूप अत्यंत उग्र और रहस्यमयी है, इसलिए इनकी पूजा एकांत और सात्विक भाव से करना शुभ होता है। इन्हें 'दारिद्रय नाशिनी' भी कहा जाता है, क्योंकि वे अभाव, दुख, और दुर्भाग्य का नाश करने वाली देवी मानी गई हैं।ALSO READ: गुप्त नवरात्रि में ये मंत्र जप लिया तो तुरंत ही दूर होंगे संकट और माता का मिलेगा आशीर्वाद
गुप्त नवरात्रि की साधनाएं बहुत प्रभावशाली होती हैं। यदि आप इसकी प्रामाणिक विधि से अनजान हैं, तो केवल मां धूमावती के मंत्रों का जाप और उनकी स्तुति करना ही आपकी समस्याओं को दूर करने के लिए पर्याप्त है। पूजा के अंत में क्षमा प्रार्थना जरूर करें।
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का विशेष महत्व तंत्र साधना, शक्ति उपासना और दस महाविद्याओं की आराधना के लिए माना जाता है। यहां मां धूमावती की पूजा विधि और कुछ महत्वपूर्ण बातें नीचे दी गई हैं:
मां धूमावती पूजा विधि
पूजा सामग्री: मां को काले तिल, काले वस्त्र, सरसों का तेल, लौंग और कड़वे तेल का दीपक अर्पित करें।
संकल्प: पूजा स्थान को गंगाजल से शुद्ध करें। मां धूमावती की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। हाथ में जल लेकर अपनी मनोकामना और बाधाओं को दूर करने का संकल्प लें। फिर धूप, दीप और पुष्प अर्पित करें।
साधना: मन ही मन या धीरे-धीरे मां के निम्न मंत्रों का जाप श्रद्धापूर्वक करें।
मां धूमावती के मंत्रों का श्रद्धापूर्वक जाप करें।
मां धूमावती के प्रमुख मंत्र
मां धूमावती की साधना के लिए सरल और प्रभावशाली मंत्र निम्नलिखित है:
- 'ॐ धूं धूं धूमावत्यै फट्'। इस मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करने से मानसिक तनाव, दरिद्रता और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति मिलती है।
सात्विक भोग: देवी को बिना लहसुन-प्याज का सात्विक भोग अर्पित करें। कई परंपराओं में उन्हें भुने चने, सूखे मेवे या सादा भोजन अर्पित करने का भी विधान बताया जाता है।
प्रार्थना: अंत में धूमावती स्तोत्र या महाविद्या स्तुति का पाठ करें और परिवार की सुख-शांति तथा संकटों से मुक्ति की प्रार्थना करें।ALSO READ: आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2026: 9 दिनों में किस देवी की करें पूजा? जानें हर दिन का महत्व और लाभ
मां धूमावती की पूजा सामान्य पूजा से थोड़ी भिन्न और गुप्त तरीके से की जाती है।
* समय: गुप्त नवरात्रि का अर्थ ही है 'गुप्त साधना', इसलिए इनकी पूजा देर रात/ निशीथ काल में करना सबसे उत्तम माना गया है।
* स्थान: घर के एक शांत और एकांत कोने में पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके बैठें।
* वस्त्र: प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा के दौरान काले या गहरे रंग के वस्त्र पहनना अनुकूल माना जाता है।
क्या रखें विशेष सावधानी?
मां धूमावती का स्वरूप उग्र है, इसलिए उनकी पूजा में कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए:
सात्विक मन: पूजा के दौरान मन में किसी के प्रति द्वेष या नकारात्मक भाव न रखें। मां धूमावती स्वयं नकारात्मकता का नाश करती हैं, इसलिए स्वयं को सकारात्मक रखें।
अनुशासन: यदि आप किसी विशेष तंत्र साधना को नहीं जानते हैं, तो घर में मां धूमावती की मूर्ति या तस्वीर स्थापित न करें। उनके चित्र का ध्यान करना या मंत्र जाप करना ही पर्याप्त है।
सरलता: यह पूजा तामसिक नहीं बल्कि 'अभावों को दूर करने की साधना' है। इसमें दिखावे की जगह आंतरिक शांति और एकाग्रता पर जोर दें।
गुरु का मार्गदर्शन: मां धूमावती 10 महाविद्याओं में से एक हैं। यदि आप इनकी गहन साधना करना चाहते हैं, तो किसी योग्य गुरु का सानिध्य और मार्गदर्शन अनिवार्य है।
अहंकार का त्याग: मां का रूप यह संदेश देता है कि संसार के सभी भौतिक सुख नश्वर हैं। पूजा करते समय अपने अहंकार को पूरी तरह त्याग दें।
धार्मिक मान्यता है कि आषाढ़ गुप्त नवरात्रि की सप्तमी तिथि पर मां धूमावती की पूजा करने से उनकी कृपा प्राप्त होती है। तथा साधक को भय, दरिद्रता, नकारात्मक शक्तियों और जीवन की अनेक बाधाओं से मुक्ति मिलती है।
अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।ALSO READ: Gupt Navratri 2026: आषाढ़ माह की गुप्त नवरात्रि कब से कब तक रहेगी?
from ज्योतिष https://ift.tt/lqTbV6v
EmoticonEmoticon