
What not to do in Pushya Nakshatra: वैदिक ज्योतिष में गुरु (बृहस्पति) को ज्ञान, धर्म, भाग्य, संतान, शिक्षा और समृद्धि का कारक ग्रह माना जाता है। वहीं पुष्य नक्षत्र को 27 नक्षत्रों में सबसे शुभ नक्षत्रों में गिना जाता है। साथ ही गुरु और पुष्य नक्षत्र का मिलन बेहद दुर्लभ और अत्यंत शुभ माना जाता है। इस बार 9 जुलाई को गुरु देव पुष्य नक्षत्र के तीसरे चरण में प्रवेश करने जा रहे हैं।ALSO READ: शुक्र का पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में गोचर, किसे मिलेगा लाभ और किसे रहना होगा सतर्क?
पुष्य को नक्षत्रों का राजा कहा जाता है, और जब देवताओं के गुरु बृहस्पति अपने ही प्रिय नक्षत्र पुष्य में गोचर (प्रवेश) करते हैं, तो यह समय आध्यात्मिक उन्नति, सुख-समृद्धि और ज्ञान के लिए एक वरदान की तरह होता है। इस बेहद शुभ अवधि का पूरा लाभ उठाने के लिए ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना चाहिए।
आइए यहां जानते हैं गुरु के पुष्य नक्षत्र में गोचर के दौरान क्या करना चाहिए, क्या नहीं करना चाहिए...
क्या करें? (Do's)
1. मंत्र जाप और साधना: गुरु और पुष्य नक्षत्र के मिलन के दौरान "ॐ बृं बृहस्पतये नमः" या विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना अत्यंत फलदायी होता है। इससे मानसिक शांति और बौद्धिक क्षमता बढ़ती है।
2. दान-पुण्य: इस समय किए गए दान का फल अक्षय, कभी न समाप्त होने वाला होता है। धार्मिक पुस्तकों, पीले वस्त्र, चने की दाल, केसर या सोने का दान करना विशेष शुभ माना जाता है।
3. विद्या और ज्ञान की शुरुआत: यदि आप कोई नई पढ़ाई, रिसर्च, गुरु-दीक्षा या कोई आध्यात्मिक कोर्स शुरू करना चाहते हैं, तो यह गोचर इसके लिए सर्वश्रेष्ठ समय है।
4. निवेश और खरीदारी: इस अवधि में सोना, चांदी, भूमि, वाहन या नए व्यापारिक सौदों में निवेश करना दीर्घकालिक लाभ देता है।
5. बड़ों और गुरुओं का आशीर्वाद: अपने माता-पिता, गुरु और वृद्ध जनों का सम्मान करें और उनका आशीर्वाद लें। गुरु गोचर के दौरान उनका आशीर्वाद आपकी प्रगति के द्वार खोलता है।ALSO READ: सूर्य का शनि के पुष्य नक्षत्र में गोचर, जानें मेष से मीन तक सभी 12 राशियों पर इसका प्रभाव
क्या न करें? (Don'ts)
1. मांगलिक कार्य न करें: ध्यान रखें कि पुष्य नक्षत्र को सभी कार्यों के लिए शुभ माना जाता है, लेकिन शादी-विवाह के लिए इसे वर्जित माना गया है, क्योंकि ब्रह्मा जी के श्राप के कारण इस नक्षत्र में विवाह शुभ नहीं माना जाता। इसलिए इस दौरान शादी-ब्याह के लग्न तय करने से बचें।
2. अहंकार और अभिमान से बचें: गुरु ज्ञान और विनम्रता के कारक हैं। इस गोचर के दौरान किसी भी बात का घमंड न करें और न ही किसी का अपमान या उपहास उड़ाएं।
3. कर्ज लेने से बचें: पुष्य नक्षत्र में धन का आगमन शुभ होता है, लेकिन इस अवधि में नया कर्ज लेने से बचना चाहिए, क्योंकि इसे चुकाने में लंबा समय लग सकता है।
4. झूठ और अधर्म का मार्ग न चुनें: गुरु धर्म के प्रतीक हैं। इस समय किसी के साथ धोखाधड़ी, झूठ बोलना या अनैतिक कार्य करने से कुंडली में गुरु का अशुभ प्रभाव शुरू हो सकता है।
5. तामसिक भोजन का त्याग: इस शुभ अवधि में मांस, मदिरा या अत्यधिक तीखे-मसालेदार भोजन से दूरी बनानी चाहिए। सात्विक जीवन शैली अपनाने से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है।
एक छोटा सा उपाय: इस गोचर के दौरान रोजाना सुबह उठकर अपने माथे और नाभि पर केसर या हल्दी का तिलक लगाएं। इससे गुरु ग्रह की सकारात्मक ऊर्जा आपके भीतर प्रवेश करती है।
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