Parvati Jayanti 2026: पार्वती जयंती, जानिए क्या है इस दिन का महत्व और कथा

Image caption: A photo of Goddess Parvati, symbol of power, good fortune, and devotion, accompanied by a Parvati Jayanti message

Parvati Jayanti Date 2026: सनातन धर्म में पार्वती जयंती का विशेष महत्व माना जाता है। यह दिन माता पार्वती के प्राकट्य का उत्सव है। देवी पार्वती को आदिशक्ति का स्वरूप माना जाता है। देवी पार्वती को शक्ति, सौभाग्य, प्रेम, त्याग और समर्पण की प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इसी दिन हिमालयराज और माता मैना के घर देवी पार्वती ने जन्म लिया था। भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए माता पार्वती ने कठोर तपस्या की थी, जिसके कारण वे अखंड सौभाग्य और अटूट वैवाहिक जीवन की अधिष्ठात्री देवी मानी जाती हैं।ALSO READ: देवशयनी एकादशी कब है, क्या करते हैं इस दिन, जानिए महत्व

 

पार्वती जयंती का महत्व

माता पार्वती को शक्ति, भक्ति, समर्पण और अखंड सौभाग्य की देवी माना जाता है। इस दिन का धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष महत्व है। माता पार्वती प्रकृति और शक्ति का स्वरूप हैं। इनकी पूजा से जीवन में नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है और सुख-समृद्धि का वास होता है।

मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और माता पार्वती की पूजा करने से महिलाओं को अखंड सौभाग्य का वरदान मिलता है और वैवाहिक जीवन की बाधाएं दूर होती हैं। यह दिन सौभाग्य और वैवाहिक सुख देने वाला होता है। अविवाहित कन्याएं यदि सच्चे मन से यह व्रत रखती हैं, तो उन्हें योग्य और मनचाहा जीवनसाथी मिलता है या मनवांछित वर की प्राप्ति होती है।

 

पार्वती जयंती मंगलवार, 21 जुलाई 2026 को 

आषाढ़ शुक्ल अष्टमी तिथि का प्रारम्भ- 21 जुलाई, 2026 को 04:02 ए एम से, 

अष्टमी तिथि का समापन- 22 जुलाई 2026 को 05:16 ए एम पर। 

 

पार्वती जयंती पर पूजा विधि

आषाढ़ शुक्ल अष्टमी के दिन प्रातः स्नान करके स्वच्छ, यदि संभव हो तो लाल या पीले वस्त्र धारण करें।

 

हाथ में जल लेकर व्रत या पूजा का संकल्प लें।

 

पूजा स्थल को साफ कर भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।

 

माता पार्वती और शिवजी की प्रतिमा को गंगाजल व दूध से स्नान कराएं या जल, दूध, दही, शहद और गंगाजल से अभिषेक करें।

 

माता पार्वती को लाल चुनरी, सिंदूर, लाल पुष्प, रोली, चंदन, अक्षत और सुहाग की सामग्री अर्पित करें।

 

शिव-पार्वती के मंत्रों का जप करें।

 

पार्वती जयंती की कथा का श्रवण या पाठ करें।

 

माता को फल, मिष्ठान या खीर का भोग लगाएं और धूप-दीप जलाकर आरती करें।

 

अंत में आरती कर परिवार की सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की प्रार्थना करें। 

 

पार्वती जयंती का पर्व शक्ति और शिव के दिव्य मिलन का प्रतीक माना जाता है। इस दिन माता पार्वती की श्रद्धापूर्वक पूजा करने से वैवाहिक जीवन में प्रेम, विश्वास और सुख बना रहता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन व्रत और पूजा करने से परिवार में सुख-शांति आती है तथा जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।

 

पार्वती जयंती की पौराणिक कथा

 

पौराणिक कथा के अनुसार, माता सती ने अपने पिता दक्ष के यज्ञ में भगवान शिव का अपमान सहन न कर पाने के कारण योगाग्नि द्वारा अपने शरीर का त्याग कर दिया था। इसके बाद उन्होंने हिमालयराज हिमवान और माता मैना के घर पार्वती के रूप में जन्म लिया।

 

माता पार्वती बाल्यकाल से ही भगवान शिव को अपना पति मानती थीं। महर्षि नारद ने उन्हें बताया कि शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या करनी होगी। नारद जी के मार्गदर्शन पर माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए हजारों वर्षों तक कठोर तपस्या की। उन्होंने जल, अन्न और यहां तक कि पत्ते यानी पर्ण खाना भी छोड़ दिया, जिसके कारण उन्हें 'अपर्णा' भी कहा गया।

 

उनकी अटूट भक्ति और समर्पण से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी रूप में स्वीकार किया। इसके बाद शिव और पार्वती का दिव्य विवाह संपन्न हुआ। यही कारण है कि पार्वती जयंती को अटूट दांपत्य प्रेम और सौभाग्य का पर्व माना जाता है।

 

पार्वती जयंती केवल देवी पार्वती के जन्मोत्सव का पर्व नहीं है, बल्कि यह प्रेम, तपस्या, समर्पण और अटूट विश्वास का संदेश भी देता है। इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से माता पार्वती तथा भगवान शिव की आराधना करने से दांपत्य जीवन में सुख, परिवार में समृद्धि और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होने की मान्यता है। इसलिए इस पावन अवसर पर पूरे श्रद्धाभाव से पूजा-अर्चना कर माता पार्वती का आशीर्वाद प्राप्त करें।

 

अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।ALSO READ: आषाढ़ गुप्त नवरात्रि में जरूर करें ये 4 काम, मां दुर्गा की कृपा से खुलेंगे सुख-समृद्धि के द्वार




from ज्योतिष https://ift.tt/nvjqwuI
Previous
Next Post »