
सूर्य से कांपती है धरती चंद्र से समुद्र:
मान्यताओं के अनुसार, सूर्य ग्रहण के बाद थल (धरती) से जुड़ी आपदाएं और चंद्र ग्रहण के दौरान समुद्री या जल से संबंधित आपदाएं अधिक आती हैं। ग्रहण के कारण वायुवेग बदलता है और आंधी-तूफान का प्रभाव बढ़ता है। समुद्र में जल की गति बदलने से आंतरिक प्लेटों पर दबाव बढ़ता है और वे आपस में टकराती हैं।
ALSO READ: 7.7 की तीव्रता वाले भूकंप से थर्राया इंडोनेशिया, सुनामी का अलर्ट
12 अगस्त 2026 को सूर्य ग्रहण और 15 अगस्त को 7.7 तीव्रता का भूकंप:
सूर्य ग्रहण से एक दिन पहले कोलंबिया में 7.4 तीव्रता के का भूकंप आया था, जिसमें सैंकड़ों लोगों की मौत हो गई। 12 अगस्त को पूर्ण सूर्य ग्रहण था और 15 अगस्त को इंडोनेशिया में सुबह 7.7 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप से हड़कंप मच गया। भूकंप के बाद सुनामी का अलर्ट भी जारी किया गया।
28 अगस्त को है चंद्र ग्रहण और नेपाल में मची तबाही
नेपाल में ग्लेशियर लेक आउटबर्स्ट फ्लड की सूचना के बाद बिहार के पश्चिम चंपारण जिला प्रशासन अलर्ट पर है। नेपाल में गंडक नदी के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र में अचानक से बिखराव हो गया जिसके चलते भीषण बाढ़ आ गई। गंडक नदी में लगभग 3 मीटर तक ऊंची लहरें उठने लगी और इसके चलते अब बिहार में भी बाढ़ का खतरा पैदा हो गया है। इस बीच असम, अरुणाचल सहित भारत के कई हिस्सों में भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए हैं।
ALSO READ: सूर्य ग्रहण से पहले कोलंबिया में 7.4 तीव्रता का भूकंप, 250 की मौत और 3000 लापता; 21 आफ्टरशॉक से दहशत
2015 का नेपाल भूकंप (गोरखा भूकंप)
तारीख: 25 अप्रैल 2015
तीव्रता: रिक्टर पैमाने पर 7.8 से 7.9
केंद्र: गोरखा जिला (बारपाक), जो काठमांडू के पास था।
नुकसान:इस भीषण भूकंप में लगभग 9,000 लोगों की मौत हुई थी और 22,000 से अधिक लोग घायल हुए थे। इसके अलावा लाखों इमारतें नष्ट हो गईं थीं।
चंद्र ग्रहण: भूकंप से 21 दिन पहले 4 अप्रैल 2015 को पूर्ण चंद्रग्रहण हुआ था।
15 जनवरी 1934 का सबसे शक्तिशाली भूकंप (बिहार-नेपाल भूकंप)
पूर्व में: इससे पहले 15 जनवरी 1934 को 8.2 का शक्तिशाली भूकंप आया था तब 17,000 लोगों की मौत हो गई थी।
ग्रहण: भूकंप के ठीक 15 दिन बाद, 30 जनवरी 1934 को आंशिक चंद्रग्रहण हुआ था। इसके 14 दिन बाद 14 फरवरी 1934 को पूर्ण सूर्यग्रहण था।
चंद्र ग्रहण का प्रभाव:
चंद्र ग्रहण से भूकंप, तूफान और प्राकृतिक आपदाएं बढ़ती है। चंद्र ग्रहण का प्रभाव समुद्र और जल क्षेत्र पर अधिक होता है। साथ ही इससे सभी प्राणियों में मानसिक हलचल और बेचैनी बढ़ जाती है। चंद्र ग्रहण के दौरान समुद्री आपदाएं यानि पानी से संबंधित आपदाएं अधिक आती हैं।
सूर्य ग्रहण का प्रभाव:
सूर्य ग्रहण का प्रभाव समुद्र को छोड़कर भूमि पर ज्यादा रहता है। इसके चलते आगजनी, पड़ाडों में भूस्खलन, ज्वालामूखी विस्फोट के साथ ही विद्रोह, आंदोलन और राजनीतिक उथल-पुथल बढ़ जाती है। कहते हैं कि सूर्य ग्रहण के आने के बाद धरती से जुड़ी आपदाएं आती हैं। समुद्र के जल के भीतर भी भूकंप आते हैं। सूर्य ग्रहण के कारण राजनीतिक उथल पुथल, विद्रोह, सामाजिक परिवर्तन, सत्ता परिवर्तन, बर्फ का पिघलना, क्लाइमेंट में बदलाव और लोगों की मानसिक स्थिति में बदलाव होता है।
40 दिनों के अंतराल में भूकंप:
जब भी कोई ग्रहण पड़ता है या आने वाला रहता है तो उस ग्रहण के 40 दिन पूर्व तथा 40 दिन बाद अर्थात उक्त ग्रहण के 80 दिन के अंतराल में बड़ा भूकंप कभी भी आ सकता है। कभी कभी यह दिन कम होते हैं अर्थात ग्रहण के 15 दिन पूर्व या 15 दिन पश्चात भूकंप आ जाता है।
वर्ष 2025 के ग्रहण और भूकंप:
वर्ष 2025 में कुल 4 ग्रहण (2 चंद्र और 2 सूर्य ग्रहण) हुए। इस दौरान वैश्विक स्तर पर कई शक्तिशाली भूकंप दर्ज किए गए। 14 मार्च को पूर्ण चंद्र ग्रहण और 29 मार्च को आंशिक सूर्य ग्रहण। 7-8 सितंबर को पूर्ण चंद्र ग्रहण (भारत में दृश्यमान) और 21-22 सितंबर को आंशिक सूर्य ग्रहण। 28 मार्च को म्यांमार में 7.7 M का भूकंप सूर्य ग्रहण से 1 दिन पहले आया। 30 सितंबर व 10 अक्टूबर को फिलीपींस में 6.9 M व 7.4 M के भूकंप आया।
from ज्योतिष https://ift.tt/ePF31Es
EmoticonEmoticon