सूर्य-चंद्र का व्यतिपात योग 26 सितंबर 2026 को, 4 राशियों के लिए बनेंगे शुभ योग

surya chandra ka vyatipat yog

भारतीय ज्योतिष और खगोल शास्त्र में सूर्य और चंद्र का व्यतिपात (व्यतिपात योग) एक विशेष और अत्यंत प्रभावकारी योग माना जाता है। वैदिक ज्योतिष के 27 नित्य योगों में से व्यतिपात 17वाँ योग है। इस बार इस योग का निर्माण 26 सितंबर 2026 को हो रहा है। सूर्य कन्या में और चंद्रमा मीन में रहेंगे। 

 

व्यातिपात का क्या अर्थ है?

गणितीय और खगोलीय दृष्टि से जब सूर्य और चंद्रमा का क्रांतिवृत्त (Longitude) पर संयुक्त जोड़ या कोण एक विशेष स्थिति (180° यानी ठीक एक-दूसरे के विपरीत) में आता है, तब ब्रह्मांड में अत्यधिक ऊर्जावान स्थिति बनती है। संस्कृत में 'पात' का अर्थ गिरना या विपत्ति होता है, इसलिए इसे ज्योतिषीय दृष्टि से अति-संवेदनशील और अशुभ माना जाता है।

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इन राशियों के लिए यह योग शुभ:

26 सितंबर 2026 को जब सूर्य कन्या राशि में और चंद्रमा मीन राशि में रहकर समसप्तक (180° आमने-सामने) स्थिति बनाएंगे, तब व्यतिपात योग का निर्माण होगा। यद्यपि व्यतिपात योग में नए सांसारिक या मांगलिक कार्यों की शुरुआत वर्जित मानी जाती है, लेकिन सूर्य-चंद्र की इस विशेष ग्रहीय स्थिति से कुछ विशिष्ट राशियों को अप्रत्याशित लाभ और सफलता मिलती है।

 

वृषभ राशि (Taurus): सूर्य आपके पंचम भाव और चंद्रमा एकादश भाव में प्रभाव डालेंगे। यह योग आपके लिए आकस्मिक धन लाभ, पुराने निवेशों से रिटर्न और आय के नए स्रोत खोलने के संकेत दे रहा है। बौद्धिक कार्यों में बड़ी सफलता मिलेगी।

 

कर्क राशि (Cancer): चंद्रमा आपकी राशि का स्वामी होकर नवम (भाग्य) भाव में रहेगा, जबकि सूर्य तृतीय भाव में गोचर करेगा। आध्यात्मिक कार्यों, पराक्रम और उच्च शिक्षा से जुड़े जातकों को जबरदस्त सफलता मिलेगी। भाग्य का पूरा साथ मिलेगा।

 

वृश्चिक राशि (Scorpio): सूर्य आपके लाभ भाव (11वें) में और चंद्रमा पंचम भाव में स्थित रहेगा। व्यापार में अटके हुए पैसे वापस मिल सकते हैं। नौकरीपेशा लोगों को पदोन्नति या नए प्रोजेक्ट में लीड करने का मौका मिल सकता है।

 

मकर राशि (Capricorn): सूर्य आपके भाग्य भाव में और चंद्रमा तृतीय भाव में रहेगा। छोटी या लंबी दूरी की यात्राओं से धन लाभ होगा। आपके साहस और निर्णय लेने की क्षमता की सराहना होगी।

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इस योग का लाभ उठाने के लिए विशेष सलाह:

साधना और मंत्र जप: इस दिन सुबह के समय सूर्यदेव को तांबे के लोटे से जल दें और ॐ घृणिः सूर्याय नमः का जाप करें।

अध्यात्म और ध्यान: सांसारिक लेन-देन या नए अनुबंधों पर हस्ताक्षर करने से बचें; इसके स्थान पर ध्यान, साधना और ज्ञानार्जन पर ध्यान केंद्रित करें।

 

व्यतिपात योग की मुख्य बातें:

शुभ कार्यों के लिए वर्जित: विवाह, गृह प्रवेश, व्यापार की शुरुआत या नए वाहन/संपत्ति की खरीदारी जैसे मांगलिक कार्यों के लिए व्यतिपात योग को अशुभ माना जाता है। इस दौरान किए गए नए कार्यों में रुकावटें या असफलता मिलने की संभावना रहती है।

 

पूजा, जप और साधना का फल: यद्यपि यह भौतिक या सांसारिक कार्यों के लिए वर्जित है, लेकिन आध्यात्मिक साधना के लिए यह योग अत्यंत फलदायी माना जाता है। मान्यता है कि व्यतिपात के समय किया गया नाम-जप, ध्यान, दान और तर्पण सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण के समान अनंत गुना पुण्य फल देता है।

 

मानसिक और शारीरिक प्रभाव: इस योग के दौरान ब्रह्मांडीय ऊर्जा का प्रवाह बहुत तेज होता है, जिससे कुछ व्यक्तियों में मानसिक तनाव, क्रोध, डिसीजन-मेकिंग में असमंजस या पाचन संबंधी समस्याएं देखने को मिल सकती हैं।

 

जन्म कुंडली में व्यतिपात योग का प्रभाव:

यदि किसी व्यक्ति का जन्म व्यतिपात योग के दौरान हुआ हो, तो उसे जीवन के शुरुआती दौर में उतार-चढ़ाव, संघर्ष या स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, ऐसा व्यक्ति बहुत बुद्धिमान, साहसी और गूढ़ विषयों का जानकार भी होता है।

उपाय: व्यतिपात काल में मानसिक शांति बनाए रखें, नए जोखिम भरे फैसले लेने से बचें और शिव मंत्र (ॐ नमः शिवाय) या सूर्य मंत्र का जाप करें।



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