
संक्रांति का शुभ मुहूर्त
पुण्य काल: दोपहर 12:06 से शाम 05:50 तक
महा पुण्य काल: दोपहर 03:55 से शाम 05:50 तक
तुला संक्रांति का देश-दुनिया पर असर
यह संक्रांति मेहनत करने वाले और छोटे उद्योगों से जुड़े लोगों के लिए बेहतर परिणाम लाएगी। हालांकि, इसके प्रभाव से बाजार में वस्तुओं की कीमतें बढ़ सकती हैं। मौसम बदलने के कारण खांसी और ठंड जैसी समस्याओं का प्रकोप रहेगा। वैश्विक स्तर पर तनाव बढ़ सकता है और बारिश की कमी से अकाल जैसी स्थिति की आशंका बन सकती है।
तुला संक्रांति क्यों है बेहद खास?
कावेरी तट पर ‘तीर्थोद्भव’ मेला: कर्नाटक में इसे ‘तुला संक्रमण’ कहते हैं। वहां कावेरी नदी के तट पर भव्य मेला लगता है, जहां पवित्र स्नान और दान-पुण्य की खास परंपरा है।
पवित्र कार्तिक स्नान की शुरुआत: तुला मास के साथ ही धार्मिक दृष्टि से अति पवित्र 'कार्तिक स्नान' का आरंभ होता है।
प्रकृति और कृषि का पर्व: यह दिन ऋतु परिवर्तन, कृषि चक्र और प्रकृति से सीधे जुड़ाव का प्रतीक है।
पितृ तर्पण और स्नान: इस दिन किसी पवित्र नदी में डुबकी लगाने और पितरों के निमित्त तर्पण करने से अक्षय पुण्य मिलता है।
गुड़-तिल का प्रसाद: पूजा-अर्चना के बाद गुड़ और तिल का प्रसाद बांटना बेहद शुभ माना जाता है।
पुराणों में महत्व: 'मत्स्यपुराण' में संक्रांति व्रत के महात्म्य का विशेष उल्लेख मिलता है। एकादशी, पूर्णिमा और प्रदोष की तरह इस दिन का भी बड़ा धार्मिक महत्व है।
from ज्योतिष https://ift.tt/Za2EHNW
EmoticonEmoticon