
Purushottam Maas 2026: नववर्ष 2026 में 'अधिकमास' होगा। 'अधिकमास' को पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। शास्त्रानुसार पुरुषोत्तम मास को अत्यंत पवित्र माना गया है। श्रीमद्भगवद्गीता में भगवना श्रीकृष्ण ने इसे अपना ही स्वरूप बताया है। जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है जब हिन्दी कैलेंडर में पंचांग की गणनानुसार 1 मास अधिक होता है, तब उसे 'अधिकमास' कहा जाता है।ALSO READ: Jupiter transit year 2026: क्या अतिचारी गुरु 2026 में लाएंगे वैश्विक महासंकट?
हिन्दू शास्त्रों में 'अधिकमास' को बड़ा ही पवित्र माना गया है, इसलिए 'अधिकमास' को 'पुरुषोत्तम मास' भी कहा जाता है। 'पुरुषोत्तम मास' अर्थात् भगवान पुरुषोत्तम का मास। शास्त्रों के अनुसार 'अधिकमास' में व्रत पारायण करना, पवित्र नदियों में स्नान करना एवं तीर्थ स्थानों की यात्रा का बहुत पुण्यप्रद होती है।
आइए जानते हैं कि 'अधिकमास' कब व कैसे होता है-
पंचांग गणना के अनुसार एक सौर वर्ष में 365 दिन, 15 घटी, 31 पल व 30 विपल होते हैं जबकि चन्द्र वर्ष में 354 दिन, 22 घटी, 1 पल व 23 विपल होते हैं। सूर्य व चन्द्र दोनों वर्षों में 10 दिन, 53 घटी, 30 पल एवं 7 विपल का अंतर प्रत्येक वर्ष में रहता है। इसी अंतर को समायोजित करने हेतु 'अधिकमास' की व्यवस्था होती है।
'अधिकमास' प्रत्येक तीसरे वर्ष होता है। 'अधिकमास' फाल्गुन से कार्तिक मास के मध्य होता है। जिस वर्ष 'अधिकमास' होता है उस वर्ष में 12 के स्थान पर 13 महीने होते हैं। 'अधिकमास' के माह का निर्णय सूर्य संक्रांति के आधार पर किया जाता है। जिस माह सूर्य संक्रांति नहीं होती वह मास 'अधिकमास' कहलाता है।
वर्ष 2026 में है 'अधिकमास'-
वर्ष 2026 में पुरुषोत्तम मास (अधिकमास) 17 मई से 14 जून के मध्य रहेगा। इस वर्ष ज्येष्ठ मास की अधिकता रहेगी अर्थात् इस वर्ष दो ज्येष्ठ मास होंगे। 'अधिकमास' की मान्यता 17 मई से 14 जून तक की होगी।
-ज्योतिर्विद् पं. हेमन्त रिछारिया
प्रारब्ध ज्योतिष परामर्श केन्द्र
सम्पर्क: astropoint_hbd@yahoo.com
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