
क्या है पंचक काल:
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार चन्द्र ग्रह का धनिष्ठा नक्षत्र के तृतीय चरण और शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद तथा रेवती नक्षत्र के चारों चरणों में भ्रमण काल पंचक काल कहलाता है। इस तरह चन्द्र ग्रह का कुम्भ और मीन राशी में भ्रमण पंचकों को जन्म देता है।
पंचक के नाम:
रविवार का रोग पंचक, मंगलवार का अग्नि पंचक, शुक्रवार का चोर पंचक, शनिवार को पड़ने वाले पंचक को मृत्यु पंचक कहते हैं। बुधवार और गुरुवार को सोमवार और मंगलवार का पंचक माना जाता है। इसके अलावा धनिष्ठा नक्षत्र में अग्नि का भय रहता है। शतभिषा नक्षत्र में कलह होने की संभावना रहती है। पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में रोग बढ़ने की संभावना रहती है। उतरा भाद्रपद में धन के रूप में दंड होता है और रेवती नक्षत्र में धन हानि की संभावना रहती है।
क्या होता है राज पंचक:
सोमवार से प्रारंभ होने वाला पंचक राज पंचक कहलाता है। यह पंचक शुभ माना जाता है और मान्यता अनुसार इसके प्रभाव से पांच दिनों में कार्यों में सफलता मिलती है खासकर सरकारी कार्यों में सफलता के योग बनते हैं साथ ही संपत्ति से जुड़े काम करना भी शुभ होता है।
5 दिनों तक रहे सतर्क:
पंचक के दौरान पांच दिनों तक इन कार्यों से दूर रहना चाहिए।
1. लकड़ी एकत्र करना या खरीदना।
2. घर की छत डलवाना।
3. शव दहन।
4. पलंग या चारपाई बनवाना।
5. दक्षिण दिशा की ओर यात्रा करना।
6. कोई भी शुभ और मांगलिक कार्य।
7. पंचक के दौरान नवविवाहित दुल्हन को विदा करना आदि कार्य नहीं किए जानें चाहिए।
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