
Bina Muhurat ke kary : ज्योतिष शास्त्र और हिंदू पंचांग में 'अबूझ मुहूर्त' का अर्थ होता है—एक ऐसा अत्यंत शुभ और पवित्र समय, जिसमें किसी भी मांगलिक कार्य को करने के लिए किसी ज्योतिषी से सलाह लेने या पंचांग देखने की आवश्यकता नहीं होती। सरल शब्दों में कहें तो, यह 'स्वयंसिद्ध मुहूर्त' है जो पूरे दिन के लिए मान्य होता है।ALSO READ: Akshaya tritiya 2026: अक्षय तृतीया कब है?
यहां वेबदुनिया के प्रिय पाठकों के लिए अबूझ मुहूर्त के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई है:
- अबूझ मुहूर्त क्या होता है?
- प्रमुख अबूझ मुहूर्त
- अबूझ मुहूर्त में क्या करें?
अबूझ मुहूर्त क्या होता है?
सामान्यतः किसी भी शुभ कार्य- जैसे विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश के लिए ग्रहों और नक्षत्रों की गणना करके मुहूर्त निकाला जाता है। लेकिन साल में कुछ दिन ऐसे होते हैं जब सूर्य और चंद्रमा की स्थिति इतनी सकारात्मक होती है कि पूरा दिन ही दोषरहित हो जाता है। इसे 'अनपूछा मुहूर्त' भी कहा जाता है। यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में ग्रह दोष हों या विवाह के लिए गुण मिलान में दिक्कत आ रही हो, तो भी अबूझ मुहूर्त में कार्य करना शुभ फलदायी माना जाता है।
प्रमुख अबूझ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार साल में मुख्य रूप से ये 4 दिन अबूझ मुहूर्त माने जाते हैं:
1. अक्षय तृतीया (आखा तीज): वैशाख शुक्ल तृतीया।
2. देवउठनी एकादशी: कार्तिक शुक्ल एकादशी।
3. बसंत पंचमी: माघ शुक्ल पंचमी।
4. भड़ली नवमी: आषाढ़ शुक्ल नवमी।
इसके अलावा कई क्षेत्रों में दशहरा और राम नवमी को भी अबूझ मुहूर्त माना जाता है।
अबूझ मुहूर्त में क्या करें?
इस पावन दिन पर आप निम्नलिखित मांगलिक और शुभ कार्य बिना किसी संकोच के कर सकते हैं:
1. विवाह संस्कार: सबसे अधिक शादियां इन्हीं दिनों में होती हैं, खासकर उन जोड़ों की जिनकी कुंडली का मिलान सामान्य दिनों में कठिन होता है।
2. गृह प्रवेश: नए घर में प्रवेश करने या नींव रखने के लिए यह सर्वश्रेष्ठ समय है।
3. व्यापार की शुरुआत: नया ऑफिस खोलना, दुकान का उद्घाटन करना या नया निवेश करना।
4. खरीददारी: सोना-चांदी, वाहन, जमीन या मकान की रजिस्ट्री कराना।
5. मुंडन और नामकरण: बच्चों के संस्कार करने के लिए यह पवित्र दिन है।
6. दान-पुण्य: इस दिन किया गया दान अक्षय यानी कभी न खत्म होने वाला पुण्य प्रदान करता है।
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