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1. क्या होते हैं राजयोग?
राजयोग तब बनते हैं जब कुंडली के केंद्र भाव (1, 4, 7, 10) और त्रिकोण भाव (1, 5, 9) के स्वामियों का शुभ संबंध बनता है। जैसे:
गजकेसरी योग: गुरु और चंद्रमा की युति और शुभ स्थिति।
पंच महापुरुष योग: मंगल, बुध, गुरु, शुक्र या शनि जब अपनी उच्च राशि या स्वराशि में हों।
नीच भंग राजयोग: जब कोई नीच का ग्रह अपनी कमजोरी त्यागकर शुभ फल देने लगे।
2. राजयोग, सोए ग्रह-भाव, प्रारब्ध और कर्म:
राजयोग का बीज: यदि कुंडली में राजयोग है ही नहीं, तो कोई भी रत्न उसे शून्य से पैदा नहीं कर सकता।
कर्म प्रधान: राजयोग अवसर देता है, लेकिन उस अवसर को सफलता में बदलना जातक के पुरुषार्थ और कर्म पर निर्भर करता है।
उपाय और रत्न: ज्योतिष के अनुसार, रत्न और उपाय केवल 30-40% तक ही सहायता कर सकते हैं। रत्न और उपाय 'सोई हुई किस्मत' को जगाने में मददगार हो सकते हैं, बशर्ते कुंडली में राजयोग की संभावना मौजूद हो। यह वैसा ही है जैसे कार में पेट्रोल (राजयोग) तो है, लेकिन बैटरी (ग्रह बल) डाउन है; ऐसे में रत्न 'जंप स्टार्ट' का काम करते हैं।
सोए ग्रह और भाव: दूसरी ओर यदि सोए ग्रह या भाव को उपायों से जगा दिए जाएं तो भी राजयोग घटित हो सकता है।
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3. सोया ग्रह या भाव:
सोया भाव:
कुंडली के जिस भाव में कोई ग्रह नहीं है और जिस पर किसी ग्रह की दृष्टि भी नहीं पड़ रही है वह सोया भाव होता है। जैसे भाग्य के स्थान पर कोई ग्रह नहीं है और उस स्थान पर किसी ग्रह की दृष्टि भी नहीं पड़ रही है तो वह सोया हुआ भाव है। कुंडली का नवां भाव सोया है तो मतलब भाग्य भी सोया हुआ है।
सोया ग्रह:
सोया भाव के अलाव सोया ग्रह से मतलब यह है कि उसका शुभ या अशुभ प्रभाव सिर्फ उसी भाव में होगा जिस भाव में वह बैठा यानी कि स्थित है। इसकी कई स्थितियां होती हैं।
1. पहली यह कि सोया ग्रह अर्थात कोई ग्रह यदि सूर्य के सपीप है तो उसे अस्त माना जाएगा।
2. दूसरा यह कि जब पहले भावों (1 से 6 तक के खाने) में कोई ग्रह न हो तो बाद के भावों ( 7 से 12 तक के खाने) के ग्रह सोये हुए माने जाएंगे।
3. तीसरा यह कि पहले भावों में कोई ग्रह न हो तो बाद के भावों के ग्रह सोये हुए माने जाएंगे।
4. चौथी स्थिति यह कि जब कोई ग्रह स्वयं की राशी, उच्च राशी या अपने पक्के घर में नहीं बैठा हो।
5. पांचवीं स्थिति भाव 10 में कोई ग्रह न हो तो भाव 2 के ग्रह सोये होंगे। भाव 2 में कोई ग्रह न हो तो भाव 9 व 10 के ग्रह सोये होंगे।
4. सोया ग्रह या भाव के उपाय:
शुभ फल पाने के लिए ग्रह से संबंधित उपाय करने होते हैं। जैसे कुंडली का प्रथम भाव सोया हुआ हो उसे जाग्रत करने के लिए मंगल का उपाय करते हैं। अगर दूसरा घर सोया हुआ हो तो चन्द्रमा के, तीसरे घर को जगाने के लिए बुध के, चौथे घर के लिए चन्द्र के, पांचवें घर के लिए सूर्य के, छठे घर के लिए राहु के, सातवें के लिए शुक्र के, आठवें के लिए चन्द्रमा, नौवें के लिए गुरु, दशम के लिए शनिदेव के, एकादश भाव के लिए गुरु के और द्वादश अर्थात बारहवें भाव के लिए की गुरु या केतु के उपाय किए जाते हैं।
उदाहरण: यदि आपका भाग्य सोया हुआ है तो आप बृहस्पति से संबंधित उपाय करें। जैसे पीपल की जड़ में नित्य जल चढ़ाएं। गुरुवार का व्रत रखें। नाक साफ रखें। पीले वस्त्र पहनें। पीले फुल वाले पौधे गृहवाटिका में लगाएं। पवित्र और प्रसन्नचित्त रहें। झूठ ना बोलें। पिता और दादा से संबंध अच्छे रखें। माथे पर केसर या चंदन का तिलक लगाएं। मांस, मदिरा आदि व्यसन से दूर रहें।
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5. क्या रत्न सोई किस्मत जगा सकते हैं?
रत्न 'कैटेलिस्ट' (उत्प्रेरक) की तरह काम करते हैं। यदि कुंडली में राजयोग मौजूद है लेकिन संबंधित ग्रह कमजोर (अंश बल में कम) है, तो रत्न उसे ऊर्जा प्रदान करते हैं।
ऊर्जा का संतुलन: रत्न ग्रहों की रश्मियों को सोखकर शरीर में उस तत्व की कमी को पूरा करते हैं।
दशा का महत्व: रत्न तभी प्रभावी होते हैं जब उस ग्रह की महादशा या अंतर्दशा चल रही हो।
सावधानी: गलत रत्न (जैसे मारक ग्रह का रत्न) राजयोग को सक्रिय करने के बजाय भारी नुकसान भी पहुँचा सकता है।
6. उपायों की भूमिका: शांति और शक्ति
उपाय दो तरह से काम करते हैं:
ग्रह शांति: यदि राजयोग पर राहु-केतु या किसी पाप ग्रह की दृष्टि है, तो दान और मंत्रों द्वारा उस बाधा को हटाया जाता है।
ग्रह मजबूती: पूजा, व्रत और मंत्र जाप के जरिए राजयोग बनाने वाले ग्रह को सक्रिय किया जाता है।
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