शनि की साढ़ेसाती के प्रथम चरण में मेष राशि, क्या बढ़ेंगी मुश्किलें या मिलेगा लाभ?

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Mesh rashifal sadhesati: मेष राशि जातकों के लिए साढ़ेसाती का प्रारंभ 29 मार्च 2025 से ही हो चला रहा है। वर्तमान में वर्ष 2026 और 2027 में भी इस का प्रभाव रहेगा। मेष राशि के 12वें भाव और मीन राशि में शनि के होने से साढ़ेसाती का प्रथम चरण प्रारंभ हुआ था। यह साढ़ेसाती 2032 तक रहेगी। चलिए जानते हैं इस साढ़ेसाती का प्रभाव और इससे बचने के 5 अचूक उपाय।

 

मेष राशि पर शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव:

वर्ष 2025 से 2027 तक प्रथम चरण: 

यदि आपकी राशि मेष है तो 30 वर्षों के बाद आपकी लाइफ पूरी तरह से चेंज होने लगी है। इन एक वर्ष में ही आपने अपने जीवन बड़े परिवर्तन देख लिए होंगे। पिछले साल आर्थिक, शारीरिक और मानसिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा होगा। वर्ष 2026 और 2027 में आपके साथ बहुत कुछ होने वाला है। आपके लिए यह साल सबसे सुनहरें रहने वाला हैं। यह साल ही नहीं बल्कि आने वाले साढ़े सात साल भी बहुत ही शानदार रहने वाले हैं।आप ने अब तक जो भी खोया था वह सभी फिर से मिल जाएगा। आपकी जो भी इच्छाएं उन सभी का पूर्ण होने का अब समय आ चुका है।  यदि आप शनि के मंदे कार्य नहीं करते हैं तो ये मानकर चलिए कि आने वाले 5 साल आपके अब तक के जीवन के सबसे श्रेष्ठ साबित होंगे। आप पर शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव 31 मई 2032 तक रहेगा। 

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आपकी कुंडली के 12वें भाव में शनि का गोचर चल रहा है। 12वें भाव से शनि आपकी कुंडली के दूसरे भाव को देखेगा जो धन और परिवार का भाव है और वहां पहले से ही गुरु विराजमान है। शनि छठे भाव को भी देखेगा जो रोग और शत्रु का भाव है, जहां गुरु की पंचम दृष्टि भी रहेगी जो शुभ परिणाम देगी। इसके बाद शनि अपनी दसवीं दृष्टि से नवम भाव को भी देखेगा जो भाग्य का भाव है। यह गुरु का भाव है। यानी हर जगह गुरु आपको शनि से बचाएगा। यदि आप अपने जन्म स्थान से दूर रह रहे हैं तो यह साढ़ेसाती आपके लिए वरदान बनकर आई है। क्योंकि शनिदेव कर्म और लाभ भाव के स्वामी होकर गुरु की राशि और गुरु के भाव 12वें भाव में गोचर कर रहे हैं। कर्मक्षेत्र में यह आपको ऊंचाइयों पर ले जाएगा। आप कोई बड़ा निवेश भी कर सकते हैं। 

 

बृहस्पति ग्रह बचाएगा साढ़ेसाती से:

हालांकि 02 जून से बृहस्पति ग्रह आपकी कुंडली के चतुर्थ भाव में आ गए हैं जिन्होंने कर्मभाव पर दृष्टि डाल दी है। 3 जून 2027 को शनि मेष राशि में गोचर करेंगे तब वे आपकी कुंडली के 12वें भाव से निकलकर पहले भाव में आकर सातवें भाव पर दृष्‍टि डालेंगे। तब तक आपको बृहस्पति के सहयोग से बेहतर भविष्य का निर्माण कर लेना चाहिए। यदि आपने अपने कर्म अच्‍छे रखे और शनि के मंदे कार्यों से दूरी बनाकर रखी तो शनि आपको लाभ देगा। ऐसा लाभ देगा कि आपने कभी सोचा नहीं होगा। शनि आपको छप्पर फाड़कर देगा।

 

शनि के बूरे प्रभाव से बचने के लिए 5 उपाय:

1. पांच शनिवार छाया दान: एक लोहे की कटोरी में सरसों का तेल भरें। शनिवार की सुबह उसमें अपना चेहरा देखें और फिर तेल सहित उस कटोरी को शनि मंदिर में दान कर दें या किसी डाकौत को दे दें। यह आपके कष्टों को सोख लेता है।

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2. हनुमान चालीसा का पाठ: शनि देव ने हनुमान जी को वचन दिया था कि वे उनके भक्तों को कभी परेशान नहीं करेंगे। प्रतिदिन हनुमान चालीसा का पाठ करें। मंगलवार और शनिवार को चमेली के तेल का दीपक जलाकर सिंदूर अर्पित करें। इसी के साथ ही गुड़, चना, चिरोंजी और मसूर की दाल अर्पित करें। 

 

3. मानवता की सेवा: कम से कम 10 दृष्टिबाधित (अंधे) लोगों को भोजन या नाश्ता कराएं। इसी के साथ ही आपके घर या ऑफिस में काम करने वाले सफाईकर्मी, मजदूर या ऑफिस कार्य कर्मचारी से मधुर व्यवहार रखें और समय-समय पर उन्हें धन या कपड़ों का दान करें। इनकी दुआएं शनि के दंड को आशीर्वाद में बदल देती हैं।

 

4. पीपल पूजा: प्रत्येक शनिवार को पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं और उसकी परिक्रमा करें।

 

5. कौवे को रोटी खिलाएं: कौवे को प्रतिदिन रोटी खिलाएं क्योंकि यह शनिदेव का वाहन और पितरों का प्रतिनिधि है।

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