आषाढ़ गुप्त नवरात्रि की नौवीं देवी मां मातंगी, जानिए पूजा विधि

The image shows the worship of Goddess Matangi on the final day of the Ashadh Gupta Navratri

Ashadha Gupt Navratri Day 9: आषाढ़ गुप्त नवरात्रि शक्ति उपासना, तंत्र साधना और दस महाविद्याओं की आराधना का अत्यंत पवित्र पर्व माना जाता है। इस दौरान साधक मां आदिशक्ति के विभिन्न स्वरूपों की उपासना कर आध्यात्मिक उन्नति, ज्ञान, सिद्धि और मनोकामनाओं की पूर्ति की कामना करते हैं।ALSO READ: गुप्त नवरात्रि में ये मंत्र जप लिया तो तुरंत ही दूर होंगे संकट और माता का मिलेगा आशीर्वाद

गुप्त नवरात्रि की नवमी तिथि पर नौवीं महाविद्या मां मातंगी की विशेष पूजा का विधान है। मां मातंगी को वाणी, ज्ञान, संगीत, कला, बुद्धि और आध्यात्मिक चेतना की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि उनकी कृपा से व्यक्ति को वाक्-सिद्धि, विद्या, रचनात्मक क्षमता, नेतृत्व कौशल और मानसिक स्थिरता प्राप्त होती है।

 

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि की नवमी तिथि पर मां मातंगी की पूजा कैसे करें? जानें पूजा विधि, बीज मंत्र, भोग, और आवश्यक सावधानियां...

 

मां मातंगी पूजा विधि

मां मातंगी की पूजा अन्य देवियों से थोड़ी भिन्न होती है, गृहस्थ साधकों के लिए सात्विक विधि इस प्रकार है:

 

दिशा और समय: पूजा के लिए उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठें। गुप्त नवरात्रि की अन्य देवियों की तरह इनकी पूजा भी रात्रि काल में अधिक फलदायी मानी जाती है।

 

आसन और वस्त्र: पूजा में बैठने के लिए लाल या हरे रंग के वस्त्र धारण करें और इसी रंग के आसन का प्रयोग करें।

 

पूजन सामग्री: मां मातंगी को लाल और नीले रंग के फूल- जैसे गुड़हल या अपराजिता, बेलपत्र, धूप, दीप और शुद्ध घी का दीपक अर्पित करें।

 

विशेष भोग: मां मातंगी को नींबू, नारियल और बेसन के लड्डू का भोग लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है। 

 

मां मातंगी को सामान्य गृहस्थों को केवल सात्विक और ताजा भोग ही लगाना चाहिए।

 

मंत्र जाप: लाल चंदन या स्फटिक की माला से मां मातंगी के मंत्रों का जाप करें।

 

मां मातंगी का सिद्ध मंत्र: वाणी में मधुरता, कला में निपुणता और जीवन के अवरोधों को दूर करने के लिए इस मंत्र का जाप करें:

 

'श्री ह्रीं क्लीं हूं मातंग्यै फट् स्वाहा।' 

 

यदि यह मंत्र कठिन लगे, तो आप इस सरल मंत्र का जाप भी कर सकते हैं: 

 

'ॐ मातंग्यै नमः' जपें।ALSO READ: Gupt Navratri 2026: आषाढ़ माह की गुप्त नवरात्रि कब से कब तक रहेगी?

 

पूजन की विशेष सावधानियां: मां मातंगी की साधना करते समय कुछ नियमों का पालन अवश्य करना चाहिए:

 

* वाणी पर नियंत्रण: चूंकि मां मातंगी वाणी की देवी हैं, इसलिए पूजा के दिन और उसके बाद भी किसी को अपशब्द न कहें, झूठ न बोलें और न ही किसी की निंदा करें।

 

* मानसिक पवित्रता: मां मातंगी शुद्धता और अशुद्धता के सामाजिक बंधनों से ऊपर हैं, लेकिन साधक को अपने मन में किसी भी प्रकार का अहंकार, ईर्ष्या या द्वेष नहीं रखना चाहिए।

 

* गुरु दीक्षा: यदि आप मां मातंगी की किसी विशेष तांत्रिक या कठिन साधना को शुरू कर रहे हैं, तो बिना योग्य गुरु के मार्गदर्शन के इसे न करें। गृहस्थों के लिए केवल भक्तिभाव से मंत्र जाप करना ही सुरक्षित और कल्याणकारी है।

 

* गोपनीयता रखें: गुप्त नवरात्रि के नियमानुसार, नौवें दिन की जाने वाली इस अंतिम साधना और इसके अनुभवों को पूरी तरह गुप्त रखें।

 

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A photograph of Goddess Matangi, the ninth of the ten Mahavidyas




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