शारदीय नवरात्रि 2026: गज पर आएंगी माता दुर्गा, जानें विदाई की सवारी और देश-दुनिया पर इसका प्रभाव

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इस वर्ष 2026 में शारदीय नवरात्रि का प्रारंभ 11 अक्टूबर 2026 रविवार से हो रहा है। रविवार होने से मां दुर्गा का आगमन हाथी (गज) पर हो रहा है और प्रस्थान (विदाई) मंगलवार के दिन होने के कारण चरणायुध (मुर्गा) या कुछ मान्यताओं के अनुसार घोड़े पर माना गया है। अधिकतर मानते हैं कि मुर्गा पर विदाई होगी। इसके परिणाम स्वरूप देश और दुनिया में तनाव अपने चरम पर पहुंच जाएगा। आप आदमी का जीवन मु्श्किल में होगा।

 

11 अक्टूबर 2026 : नवरात्रि घट स्‍थापना एवं पूजा मुहूर्त

घटस्थापना का मुहूर्त
सुबह 06:19 से 10:11 बजे तक।

पूजा के शुभ मुहूर्त

अभिजित मुहूर्त: सुबह 11:44 से दोपहर 12:31 बजे तक। 

गोधूलि मुहूर्त: शाम 05:56 से 06:21 बजे तक।

विजय मुहूर्त: दोपहर 02:04 से 02:50 बजे तक।

चौघड़िया मुहूर्त 

लाभ चौघड़िया: सुबह 09:13 से 10:41 बजे तक।

अमृत चौघड़िया: सुबह 10:41 से दोपहर 12:08 बजे तक।

शुभ चौघड़िया: दोपहर 01:35 से 03:02 बजे तक।

अमृत चौघड़िया: शाम 07:29 से रात्रि 09:02 बजे तक।

चर चौघड़िया: सुबह 07:46 से 09:13 बजे तक।

 

माँ दुर्गा का वाहन:

देवी पुराण के प्रसिद्ध श्लोक के अनुसार:

"गौतमीये गजेश तुरंगे सूर्य भौमे शनौ छत्रधिया।"

अर्थात्, यदि नवरात्रि का प्रारंभ रविवार या सोमवार को हो तो माता हाथी पर आती हैं; शनिवार या मंगलवार को हो तो घोड़े (अश्व) पर आती हैं; बृहस्पतिवार या शुक्रवार को हो तो पालकी/डोली पर आती हैं; और बुधवार को हो तो नौका (नाव) पर आती हैं। 

 

"शशिसूर्ये गजारूढ़ा शनिभौमे तुरङ्गमे गुरौ शुक्रे च दोलायां बुधेऽ नौका प्रकीर्तिता"- देवी भागवत पुराण

भावार्थ: नवरात्रि का आरंभ सोमवार और रविवार को होने पर मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर आती हैं। शनिवार और मंगलवार को नवरात्र का आरंभ होने पर भगवती घोड़े पर सवार होकर आती हैं। वहीं, गुरुवार और शुक्रवार को नवरात्र का आरंभ होने पर मां दुर्गा डोली में सवार होकर पधारती हैं। इसके अलावा, अगर नवरात्र का आरंभ बुधवार को हो, तो मां दुर्गा नाव पर सवार होकर आती हैं।

 

माता के हाथी पर सवार होकर आने का फल

ज्योतिषशास्त्र और शास्त्रों में माँ दुर्गा का हाथी पर सवार होकर आना अत्यंत शुभ और कल्याणकारी माना जाता है। हाथी को सुख, समृद्धि, ज्ञान और शांति का प्रतीक माना गया है। 9 दिनों तक देश के कुछ स्थानों को छोड़कर सुख शंति और समृद्धि बनी रहेगी। आर्थिक गतिविधियों में सुधार होगा लेकिन माता दुर्गा का मुर्गे पर सवार होकर जाना शुभ संकेत नहीं।

 

माता दुर्गा का प्रस्थान मुर्गे पर हो रहा है तो क्या फल रहेगा?

ज्योतिषीय मान्यताओं और देवी भागवत पुराण के अनुसार, यदि माता दुर्गा की विदाई (प्रस्थान) मुर्गे (चरणायुध/कुक्कुट) पर होती है, तो इसे अत्यंत अशुभ माना जाता है। मुर्गे पर प्रस्थान का मुख्य संदेश देश और दुनिया में अशांति, प्राकृतिक उथल-पुथल और जन-धन की हानि से जोड़ा जाता है।

 

सामाजिक एवं राजनीतिक तनाव: समाज में आपसी असंतोष, वैचारिक मतभेद और तनाव बढ़ता है। देश या दुनिया में राजनीतिक उठापटक और विवादों की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

प्राकृतिक आपदाएं और दुर्घटनाएं: चक्रवात, भीषण तूफान, या अन्य प्राकृतिक आपदाओं और दुर्घटनाओं की आशंका में वृद्धि होती है।

जन-स्वास्थ्य एवं कष्ट: लोगों में बीमारियां, मानसिक तनाव और शारीरिक कष्‍ट बढ़ने की संभावना रहती है।

आर्थिक उतार-चढ़ाव: बाजार में अनिश्चितता और आर्थिक मंदी या अस्थिरता का प्रभाव देखने को मिल सकता है।

उपाय एवं बचाव के लिए सुझाव

यदि माता का प्रस्थान मुर्गे पर हो रहा हो, तो इसके नकारात्मक प्रभावों को कम करने के लिए शास्त्रों में कुछ आध्यात्मिक उपाय बताए गए हैं:

दुर्गा सप्तशती या सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का पाठ: नवरात्र विसर्जन के बाद भी नियमित रूप से दुर्गा मां की आराधना करें।

दान-पुण्य: गरीबों और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और गुप्त दान करें।

हनुमान जी की उपासना: हनुमान चालीसा या सुंदरकांड का पाठ करने से भय, असंतोष और संकटों का शमन होता है।

सद्भाव और संयम: घर और समाज में संयम बनाए रखें तथा किसी भी प्रकार के व्यर्थ विवाद से बचें।

 



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