भविष्य मालिका भविष्यवाणी: क्या सच में होगा रिजीम चेंज? जानें क्या इशारा कर रहे हैं ग्रह-नक्षत्र

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भविष्य मालिका के अनुसार, कलयुग के 5000 वर्ष पूरे होने के बाद 'संधिकाल' शुरू हो चुका है। कई व्याख्याकारों का मानना है कि 2020 से 2032 के बीच की अवधि अत्यंत महत्वपूर्ण और विनाशकारी हो सकती है। इस दौरान भारत के प्रमुख को बाहरी और भीतरी चुनौतियों का कड़ा सामना करना पड़ेगा। वर्तमान में भारत की सरकार को बदलने यानी रिजीम चेंज करने की बात कही जा रही है। ज्योतिष और भविष्य मालिका सहित अन्य भविष्यवक्ता इस संबंध में क्या कहते हैं- चलिए जानते हैं।

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ग्रह नक्षत्र क्या कहते हैं?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 सितंबर 2026 को वे 76 साल के हो गए हैं। ज्योतिषियों के अनुसार पीएम मोदी की कुंडली में दिसंबर 2020 से मई 2027 तक मंगल की महादशा प्रभावी है। इसका अर्थ है कि मई 2027 तक वे हर तरह की चुनौतियों से बाहर निकल कर आ जाएंगे। इसके बाद उनके ग्रहों की दशा में परिवर्तन होगा। 2027 के उत्तरार्ध या 2028 में वे स्वयं किसी नए नेतृत्व को जिम्मेदारी सौंपने या मार्गदर्शक भूमिका में जाने का निर्णय ले सकते हैं। 

 

हालांकि प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य शर्मिष्ठा, श्री संत बेत्रा अशोका जी, आचार्य राज मिश्रा आदि के अनुसार नरेंद्र मोदी जी अपना कार्यकाल पूरा करेंगे और अपनी स्वेच्छा से वे पद छोड़ सकते हैं। उनकी मर्जी के बगैर उन्हें कोई नहीं हटा सकता। उनका एक पेंडिंग टॉस्क है- POK लेना, जिसे लिए बगैर वे कहीं नहीं जाने वाले हैं। यह साल 2083  प्रोटेस्ट का साल है मार्च 2027 के बाद प्रोटेस्ट कम हो जाएंगे, इसके बाद वर्ष 2028 के मध्य में प्रोटेस्ट हो सकते हैं।

 

मोदी के बारे में क्या कहती है भविष्‍य मालिका?

भविष्य मालिका के अनुसार 'नरेंद्र' नाम का शासक भारत का प्रतिनिधित्व करेगा। उनके शासनकाल में भारत पर आक्रमण की स्थिति बन सकती है, जिसमें 13 मुस्लिम देश और चीन शामिल हो सकते हैं। इस युद्ध के बाद भारत की विजय होगी। इसके बाद मालिका के अनुसार भारत की बागडोर एक अविवाहित, शक्तिशाली योगी पुरुष के हाथों में जाने का उल्लेख मिलता है। 

 

क्या सच में लगेगा भारत में मिलिट्री शासन?

ज्योतिष मानते हैं कि वर्ष 2027 में शनि के नीच राशि (मेष) में गोचर, राहु-केतु के परिवर्तन और अतिचारी गुरु के प्रभाव से देश व वैश्विक पटल पर भारी राजनीतिक उथल-पुथल तथा जन-असंतोष देखने को मिलेगा, इसके चलते भारत में हिंसक प्रदर्शन को भारत शक्ति के जरिये दबाने में कामयाब होगा। हालांकि 2028 तक नरेंद्र मोदी कापद पर बने रहना मुश्किल होगा और देश में किसी नए चेहरे का उदय होगा।

 

बाण बसु राजा नरेन्द्र साल, थोकाए नष्ट हेबे महा मल।

चन्द्रबाण रामबाण थोइबु, एहि सालटि ठिकणा जाणिबु।

बाण (5) बसु (राजा नरेंद्र साल यानी की राजा नरेंद्र के 13 वे वर्ष ( 2027 ) में बहुत दुष्टों का विनाश होगा। चन्द्र (15) बाण (5), राम (4 या 7) बाण (5) यानी  20 और 9/11 अंक में ये होगा।- कलि कलप गीता, नवम अध्याय, महापुरुष श्री अच्युतानंद दास।
उल्लेखनीय है कि वायरल हो रही भविष्यवाणी के अनुसार महापुरुष अच्युतानंद दास जी ने अपने मालिका ग्रंथ 'चउषठि पटल' में श्री कृष्ण और अर्जुन के बीच हुए संवाद को उद्धृत किया। इसमें नरेंद्र नामक व्यक्ति के भारत पर शासन की बात कही गई है।

 

ता परे राजुति हेब, मिलिट्री शासन।- भविष्य मालिका

अर्थ: "उसके बाद मिलिट्री (सैन्य) शासन का राज होगा।

कथावाचन पंडित पंडित काशीनाथ मिश्र जी की व्याख्‍या के अनुसार महापुरूष अच्युतानंद दास जी ने लिखा था कि मोदी जी के शासन के समय में मिलिट्री इमरजेन्सी शासन भी लगेगा। एक संत के शासन काल में तृतीय विश्व युद्ध, भारत और पाकिस्तान का महायुद्ध भी होगा।

 

भविष्य मालिका और उसके रचयिता

ओडिशा के संत अच्युतानंद दास (1510–1631) ने 'भविष्य मालिका' की रचना की, जिसमें कलयुग के अंत और भविष्य की घटनाओं का वर्णन है। वर्तमान में इसकी पांडुलिपि अज्ञात है, लेकिन कथावाचक पंडित काशीनाथ मिश्र द्वारा अनुवादित 'भविष्य मालिका पुराण' की भविष्यवाणियाँ इंटरनेट पर काफी चर्चित हैं।

 

प्रमुख भविष्यवाणियाँ और घटनाक्रम

तीन चरण: धरती तीन चरणों से गुजरेगी- कलयुग का अंत, महाविनाश (प्राकृतिक आपदाएँ व युद्ध) और नए युग का आगमन।

शनि गोचर और युद्ध का कालखंड: 2025 से 2028 के बीच (शनि के मीन राशि में रहने के दौरान) विश्व में भारी अराजकता और युद्ध की स्थितियाँ बनेंगी। 2028 से 2030 (शनि के मेष राशि में जाने) के बीच महाविनाश का दौर समाप्त होकर नए युग की शुरुआत होगी।

तृतीय विश्व युद्ध और वैश्विक गठबंधन: कश्मीर और सिंधु जल विवाद को लेकर भारत-पाकिस्तान युद्ध छिड़ेगा, जो तीसरे विश्व युद्ध का रूप ले लेगा। इसमें चीन, पाकिस्तान और 13 मुस्लिम देश एकजुट होकर भारत पर पूर्व व पश्चिम से आक्रमण करेंगे। अमेरिका और ब्रिटेन भी उनका सहयोग करेंगे, जबकि रूस भारत का साथ देगा।

युद्ध का समय और परिणाम: कुल युद्ध लगभग 6 साल 6 महीने चलेगा, जिसमें अंतिम 13 महीने भारत सक्रिय रूप से लड़ेगा। अंततः भारत की विजय होगी, पाकिस्तान का अस्तित्व समाप्त होकर वह अखंड भारत का हिस्सा बनेगा और आतंकवाद का अंत होगा। अमेरिका और रोप में तबाही होगी।

भारत का नेतृत्व: इस संकट के समय देश की बागडोर एक अविवाहित, योगी और शक्तिशाली हिंदू राजा/संत के हाथ में होगी, जो देश में सैन्य शासन लागू करेगा और धर्म के आधार पर विश्व शांति स्थापित करके भारत को 'विश्व गुरु' बनाएगा।

 

एक महत्वपूर्ण तथ्य

मूल ओड़िया ग्रंथ में 'पाकिस्तान' शब्द नहीं है, क्योंकि उस समय यह देश अस्तित्व में नहीं था। वहाँ 'यवन', 'म्लेच्छ' या 'सिंधु क्षेत्र' लिखा है, जिसे आधुनिक व्याख्याकारों ने पाकिस्तान और उसके सहयोगी देशों के रूप में अनुवादित किया है।

 

डिस्क्लेमर : उपरोक्त जानकारी विभिन्न स्रोत पर आधारित है। इसकी आधिकारिक पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है।   



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