
वर्तमान के ग्रह गोचर 2026:
वर्तमान में मीन राशि में मंगल के प्रवेश के साथ ही शनि से उनकी युति बनी है लेकिन शनि अभी अस्त है इसलिए माहौल अभी शांत है। लेकिन 11 अप्रैल को शनि का उदय जब होगा तो मंगल और शनि का डिस्टेंस करीब करीब नजदीक ही समान डिग्री पर होगा। यानी 11 अप्रैल से 11 मई तक का समय सबसे खराब समय है। वर्तमान में सूर्य भी मीन में है लेकिन 14 अप्रैल को वे मेष में गोचर करेंगे। इस दौरान काल सर्पदोष भी रहेगा। शांति वार्ताएं सभी असफल होगी। यह समय बड़े नेताओं के लिए घातक है। मिडिल ईस्ट में कुछ बड़ा होने की प्रबल संभावना है। 21 जून 02 अगस्त तक खप्पर योग रहेगा जो आग में घी डालने का काम कर सकता है। भारत सहित दुनिया के कई देशों पर संकट के बादल छाने लगे हैं। ऐसे में सतर्क रहने की जरूरत है। जुलाई में कुछ देशों के साथ ही भारतीय राज्य में सत्ता परिवर्तन होगा। अगस्त में भारत पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर रह सकता है। सितंबर में भारत की राजनीति में परिवर्तन होगा। अक्टूबर से दिसंबर के बीच आतंकी घटना और किस बड़े नेता के जीवन पर संकट नजर आ रहा है।- शनि-मंगल का प्रभाव (द्वंद्व और विस्फोटक योग)
- राहु-केतु का कर्मात्मक गोचर (कालसर्प योग)
- गुरु (बृहस्पति) की स्थिति (अतिचारी प्रभाव)
- मीन राशि में चतुर्ग्रही योग (सूर्य, शनि, मंगल)
- खप्पर योग 02 अगस्त तक।
शनि गोचर और वैश्विक प्रभाव: 2020 से 2028
दंड काल: वर्तमान समय शनि के 'दंड' का काल है, जो अंततः विध्वंस के माध्यम से एक नए युग के सृजन की ओर ले जाएगा। शनि का विभिन्न राशियों में गोचर दुनिया के लिए बड़े बदलाव और संकट लेकर आया है। ज्योतिषीय दृष्टिकोण से इसका घटनाक्रम इस प्रकार है:मकर एवं कुंभ शनि (2020-2024): मकर राशि में शनि के प्रवेश से कोरोना महामारी आई। कुंभ राशि में प्रवेश के साथ ही रूस-यूक्रेन युद्ध, इज़राइल-हमास संघर्ष और भीषण प्राकृतिक आपदाओं का दौर शुरू हुआ।
मीन शनि (2025): मीन राशि में गोचर के दौरान भारत-पाक और ईरान-इज़राइल जैसे नए युद्ध भड़कने और विमान हादसों जैसी घटनाओं का योग बना। हालांकि, इसी दौरान ज्ञान-विज्ञान में प्रगति भी हुई।
मेष शनि और 'महादंगल' (2026-2027):9 अगस्त 2027 को शनि मेष में गोचर करने लगेगा। वर्ष 2026 में गुरु के कमजोर होने और शनि की वक्री चाल के कारण दुनिया भीषण युद्ध और अराजकता की चपेट में आ सकती है। वर्तमान में मिडिल ईस्ट में युद्ध चल ही रहा है। भविष्यवाणियों के अनुसार, 2026 से 2027 के बीच भारत एक बड़े युद्ध का हिस्सा बन सकता है, जिसमें भारत की सैन्य शक्ति अजेय रहेगी और उसकी वैश्विक प्रतिष्ठा बढ़ेगी।
परिवर्तन और नया सृजन (2028 तक):
2020 से शुरू हुआ विनाश का यह चक्र 2028 तक चलेगा। शनि पुराने वैश्विक ढांचे, भूगोल और नक्शों को बदलकर एक नई विश्व व्यवस्था की नींव रखेगा। अतिचारी बृहस्पति के दौरान वर्ष 2026 में मंगल का शनि और राहु के साथ संयोग और शनि की वक्री एवं मार्गी चाल एक 'महादंगल' की ओर इशारा कर रही है।बृहस्पति के कमजोर होने के कारण यूं समझो कि वर्तमान में खुलेआम घूम रहे निरंकुश शनि का दंड चल रहा है। यह शनि बहुत जल्द ही युद्ध की ऐसी आग भड़काएगा कि दुनिया के कई देश इसे आग में जलकर भस्म हो जाएंगे। तख्तापलट, जनविद्रोह और अराजगता के साथ ही मौत का तांडव देखने को मिलेगा। इसी के साथ ही कई देशों के भूगोल यानी नक्क्षे बदल जाएंगे। ऐसे समय में भारत की जनता को संयम और सतर्कता से रहने की जरूरत है।
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